‘अदालत ने फैसले में कहा है कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण से बचाया गया और कोई भी राजनीतिक पार्टी ऐसे कामों में लिप्त होती है तो उसकी मान्यता रद्द होनी चाहिए। यह दंगे नहीं बल्कि नरसंहार था। कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर पर भी इसी प्रकार के आरोप है और विश्वास है कि उनको भी सजा मिलेगी।’
- मनोज तिवारी, अध्यक्ष, दिल्ली भाजपा
‘कांग्रेस सरकार ने दगों की जांच आगे नहीं बढ़ने दी और केजरीवाल सरकार ने एसआईटी का सहयोग नहीं किया था। मामलों को दबाने की पूरी कोशिश की गई। आप सरकार ने अपनी एसआईटी गठित कर मामले को भ्रमित करने का प्रयास किया था। आप की कांग्रेस से गठबंधन की इच्छा से दोनों की मिलीभगत सिद्ध हो गई है।’
- विजेंद्र गुप्ता, नेता प्रतिपक्ष
‘केंद्र सरकार ने अगर दंगा मामले में गठित एसआईटी खत्म नहीं किया होती तो अब तक कई लोग जेल में होते। ‘आप’ के 49 दिन के शासन में एसआईटी गठन के फैसले को तत्कालीन उपराज्यपाल ने रोके रखा। अब बाकी मामलों में भी पीड़ितों को जल्द इंसाफ मिलना चाहिए। न्याय में देरी अन्याय के समान है।’
- संजय सिंह, सांसद, आप
‘हम हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। कोर्ट का फैसला दंगा पीड़ितों के लंबे कष्टदायक इंतजार के बाद आया है, जिनके परिजनों की हत्या उस वक्त के सत्ता पर काबिज लोगों ने की थी। कोई कितना भी ताकतवर हो, दंगों में हाथ होने पर उसे नहीं बख्शा जाना चाहिए। कोर्ट को लंबित मामलों को जल्द निपटाना चाहिए।’
- अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली
‘दंगों के मुख्य दोषी कानून से बचे हुए हैं। यह तो अभी शुरुआत है, न्याय का बाकी हिस्सा तो अभी शेष है। इस नरसंहार के सभी दोषी पकड़े जाएंगे और उन्हें कठोरतम सजा दी जाएगी। उस समय के सत्ता के शिखर पर बैठे कांग्रेसी नेता इस बर्बर नरसंहार के सूत्रधार थे। इन नेताओं को सजा के बाद ही सिख समुदाय को राहत मिलेगी।’
डॉ. सुरेंद्र जैन, अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव, विहिप