अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार के अभियोजन निदेशालय द्वारा जारी एक विज्ञापन पर रोक लगा दी। इसमें 196 रिक्त सार्वजनिक अभियोजक पदों के लिए केवल रिटायर्ड अभियोजकों से आवेदन मांगे गए थे। कोर्ट ने इस कदम को अस्वीकार्य और दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि इससे युवा वकीलों को अवसरों से वंचित किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने 22 अगस्त को जारी इस विज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अभियोजन निदेशक, दिल्ली के मुख्य सचिव, गृह विभाग के प्रधान सचिव और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने इन सभी को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई अक्तूबर में निर्धारित की। कोर्ट ने आदेश दिया कि दिल्ली सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव को याचिकाकर्ता की शिकायत पर विचार करना होगा। जब तक इस पर तर्कसंगत निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक विज्ञापन पर रोक रहेगी। याचिकाकर्ता वकील विकास वर्मा ने तर्क दिया कि यह विज्ञापन यूपीएससी या अन्य सक्षम प्राधिकरणों के माध्यम से स्थापित भर्ती प्रक्रिया को दरकिनार कर जारी किया गया है।