कोर्ट ने कहा- प्लेटफॉर्म से जुड़ी चिंताओं को शुरुआती दौर में ही संभालना होगा।
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। चीनी एआई चैटबॉट डीपसीक से भारतीयों की गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने के आरोप लगाने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से ठोस योजना मांगी है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की डिवीजन बेंच ने बुधवार को केंद्र के स्टैंडिंग काउंसल ईशकरण भंडारी से पूछा कि इस प्लेटफॉर्म से जुड़ी चिंताओं को शुरुआती दौर में ही संभालना होगा। मंत्रालय इसे कैसे निपटेगा? सरकार से निर्देश लें।
वकील भावना शर्मा की याचिका में डीपसीक को पूरी तरह ब्लॉक करने, सरकारी डिवाइस से हटाने और ऐसे विदेशी एआई टूल्स पर दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई है। याचिका का तर्क है कि यह डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट और आईटी नियमों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इसे इटली ने बैन कर दिया, ऑस्ट्रेलिया ने सरकारी डिवाइस पर रोक लगाई और भारत सरकार ने भी आंतरिक निर्देश जारी कर सरकारी कंप्यूटर्स पर इस्तेमाल बंद किया है। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश लेने का समय दिया और संबंधित अन्य मामलों के साथ अगली सुनवाई तय की। डीपसीक चीन की हांगझोउ स्थित कंपनी का ओपन-सोर्स एआई चैटबॉट है। इसका डेटा चीनी सर्वर पर स्टोर होता है, जिससे साइबर हमले, डेटा लीक और राष्ट्रीय संप्रभुता को खतरा बताया जा रहा है।