वहीं हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वह पड़ताल करें कि क्या शिकायतकर्ता और उसकी पड़ोसी ऐसे अन्य मामलों में भी शामिल हैं? अगर ऐसा है तो उनके खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा वह सभी थानों से ऐसे मामलों में रिपोर्ट मंगवाएं और इस बाबत चार सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय करते हुए आदेश की कॉपी पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया है।
अभियोजन के अनुसार पीड़िता ने निजी सहायिका की नौकरी के सिलसिले में 24 अगस्त को आरोपी को मैसेज किया था। उसने अपनी लोकेशन भी भेजी थी। इसके बाद आरोपी कथित रूप से शराब की बोतल लेकर पहुंचा था। वहां शराब पीने के बाद पीड़ित से दुष्कर्म किया। पीड़िता ने अपनी पड़ोसन को मदद के लिए बुलाया। जब पड़ोसन वहां आई तो उसने आरोपी को पीड़ित के घर से आरोपी को भागते हुए देखा।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता विकास पाहवा ने अभियोजन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि व्हाट्सएप चैट के अनुसार महिला ने एक जॉब पोर्टल से उनके मुव्वकिल का नंबर हासिल किया था और निजी सहायिका की नौकरी के बारे में पूछा था। जब आरोपी ने इसकी सहमति दी तो महिला ने प्रोफेसनल ड्रेस में फोटो भेजने के बजाय उसने बाथिंग सूट और बिकनी वाली तस्वीरें उसे भेजीं। उसके बाद महिला ने उनके मुव्वकिल की किसी भी बात का विरोध नहीं किया।
पाहवा ने कहा कि पूरी चैट में कहीं भी वेकेंसी, वेतन या वर्किंग ऑवर का जिक्र नहीं है, बल्कि महिला ने उनके मुव्वकिल को प्रलोभन देने के लिए स्वीम पूल में बिकनी वाली तस्वीरें भेजीं। इसके बाद महिला ने आरोपी को अपने घर बुलाया और उससे पांच लाख रुपये मांगे और जब उसने दिए तो उस पर दुष्कर्म का आरोप लगा दिया। जब उसे एफआईआर के बारे में पता चला तो उसने पुलिस के पास जाकर अपनी बात रखी और आवेदन भी दिया लेकिन महिला व उसकी सहयोगी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पाहवा ने कहा इन दिनों प्रचलित ऐसे मामलों को तीन श्रेणी में रखा जा सकता। एक, सोशल मीडिया के जरिये अजनबी लोगों से संपर्क करो। दूसरे, अगर वह शख्स जवाब देता है तो इसका मतलब उसकी दिलचस्पी है, उसके बाद उसे तस्वीरें तथा वीडियो भेजकर उसे प्रलोभन दो। तीसरे जब वह शख्स फंस जाए तो उसे घर बुलाकर उसकी वीडियो बनाकर उस पर झूठा आरोप लगाकर धमकी दो और तब पैसे की डिमांड करो।