न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने ये आदेश इस वजह से जारी किया क्योंकि उनका प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल उपलब्ध नहीं थे। इससे पहले शीर्ष अदालत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को पुरकायस्थ की स्वास्थ्य स्थिति की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था। इसके तहत याचिकाकर्ता के जेल रिकॉर्ड और संपूर्ण चिकित्सा इतिहास पर भी विचार किया जाएगा। शीर्ष अदालत का यह निर्देश तब आया जब सिब्बल ने पीठ को बताया कि उनके मुवक्किल की चिकित्सीय स्थिति के बारे में जेल अधिकारियों की ओर से दायर रिपोर्ट सही नहीं थी।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे न्यूजक्लिक के संस्थापक
राष्ट्र विरोधी प्रचार को बढ़ावा देने के लिए चीनी फंडिंग को लेकर यूएपीए के तहत अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए पुरकायस्थ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने शीर्ष अदालत में दिल्ली हाईकोर्ट के 13 अक्तूबर, 2023 के आदेश को चुनौती दी, जिसमें ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए उन्हें पुलिस हिरासत में भेजा गया था।
उसके बाद से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इससे पहले न्यूजक्लिक के मानव संसाधन विभाग के प्रमुख अमित चक्रवर्ती ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली थी। दिल्ली की एक अदालत ने समाचार पोर्टल के खिलाफ दर्ज मामले में चक्रवर्ती को सरकारी गवाह बनने की अनुमति दे दी थी।
चीन समर्थक प्रचार के लिए धन लेने का आरोप
पुरकायस्थ और चक्रवर्ती को दिल्ली पुलिस की विशेष सेल ने तीन अक्तूबर को यूएपीए के तहत दर्ज एक मामले में ऑनलाइन समाचार पोर्टल और उसके पत्रकारों से जुड़े 30 स्थानों की तलाशी के बाद गिरफ्तार किया था। आरोप है कि पुरकायस्थ ने चीन समर्थक प्रचार के लिए धन प्राप्त किया है। पुरकायस्थ और चक्रवर्ती ने बाद में गिरफ्तारी व सात दिन की पुलिस हिरासत को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ स्थिरता, अखंडता, संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले गंभीर अपराधों को देखते हुए उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थीं।