तावडू से पांच किलोमीटर दूर देश का पहला हैरीटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम करीबन 10 महीनें पहले बनाया गया है। संग्रहालय में परिवहन के विभिन्न नमूनों को बहुत ही आकर्षक एवं रोचक ढ़ंग से प्रस्तुत किया हुआ है।
विभिन्न शताब्दियों में यातायात के साधनों में आए बदलाव की उपयोगी जानकारी भी यहां पर मिलती है। यह देश का ऐसा पहला संग्रहालय है, जो हरियाणा में स्थापित किया गया है। इसमें पुराने से पुराने मॉडलों के वाहन मौजूद है। लेकिन इस सबके बावजूद इसका वजूद खतरे में नजा आ रहा हैं।
संग्राहालय के बारे में क्षेत्र के लोग बिलकुल अनभिज्ञ है। जिन्हें अभी तक संग्राहालय के बारे में पता ही नही है कि मेवात जिला के खंड तावडू कस्बे के साथ देश का पहला वाहन संग्राहालय भी बना हुआ है।
संग्राहालय में क्षेत्र के लोग महीनों में कभी कभार पंहुच पाते है । विदेशी पर्यटक भी इसे देखने में कोई खास रूचि नहीं ले रहे है। अगर यही हाल रहा तो इसके बंद होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
संग्राहालय के प्रति लोगों की रूचि कम होने का मुख्य कारण इसकी इंट्री फीस ज्यादा होना भी बताया गया है। जिस उद्देश्य को लेकर यह संग्राहालय यहां खोला गया हैं। इससे नही लगता की हैरीटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम के मालिक का सपना साकार होगा।
काबिलेगौर है की यह संग्राहालय 6 एकड में करीबन 12 करोड़ की लागत से बना है। जिसके तीन एकड़ हिस्से में ग्रीन बेल्ट व तीन एकड़ हिस्से के संग्रहालय में परिवहन साधनों के विकास के इतिहास को दर्शाने का प्रयास किया गया है।
संग्रहालय में प्रदर्शित प्राचीन समय के दुर्लभ परिवहन साधन जिनमें लकड़ी के पहियों वाली बैलगाड़ी, ऊंटगाड़ी, बग्घी, साइकिल, रिक्शा, पुराने स्कूटर, ट्राम का नमूना, रेलगाड़ी, हैलीकाप्टर, एयर क्राफ्ट आदि के नमूने इस संग्रहालय में मौजूद है।
संग्राहलय में पाईपर कब जे 3 सी 1947 का एयरक्राफ्ट भी मौजूद है। संग्राहालय में 1938 मॉडल की फोर्ड वी एट, 1952 की इंटरनेशनल बस, 1958 की जीप पिकअप एफसी, 1969 की हिन्दुस्तान वेडफोर्ड, 1948 फोर्डसन, 1969 की हिन्दुस्तान एम्बेस्टर, 1946 की फोर्ड सुपर डिलेक्स स्टेशन वेगन आदि मॉडलों की अनेकों छोटी बडी गाड़िया संग्राहालय को सुशोभित कर रही है।
पूरे भारत में मुखतलिफ म्यूजियम है, लेकिन यह देश का पहला ट्रांसपोर्ट म्यूजियम है लेकिन इस सबके बावजूद म्यूजियम के प्रसिद्ध होने से पहले ही इसका अस्तित्व खतरे में आने लगा है।
इस संग्राहालय में स्टाफ का भी भारी टोटा है। क्यूरो आडोटोरियम, हाउस कीपिंग, सुरक्षा, म्यूजियम असिस्टेंट, टेकनीकल असिस्टेंट, सेल और मार्किटिंग व माली विभागों में कुल सत्ताईश कर्मचारी नियुक्त किए हुए है।
संग्राहालय के खुलते समय क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को उम्मीद थी कि उन्हें इस संग्राहालय में रोजगार प्राप्त होगा। लेकिन संग्राहालय में विदेशी पर्यटकों की नगण्य संख्या से नहीं लगता कि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिल पायेगा।
हेरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम की आधारशिला 2010 में रखी गई थी। जिसका उद्घाटन 7 दिसम्बर 2013 को प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रसिंह हुड्डा द्वारा किया गया था।