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'ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए करें हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल'

Fri, 11 Mar 2016 08:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाईकोर्ट - फोटो : file photo
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हाईकोर्ट ने राजधानी में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण व यातायात जाम के मुद्दे पर केंद्र व दिल्ली सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या यातायात प्रबंधन व मेडिकल इमरजेंसी में मरीज को एयरलिफ्ट करने के लिए दिल्ली में हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ ने यातायात पुलिस को सलाह दी कि यातायात नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों का मौके पर ही चालान किया जाए।

वहीं, अव्यवस्थित यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाए, जिससे लोगों को जाम में फंसने की समस्या से राहत मिलेगी और वायु प्रदूषण भी कम होगा। अदालत ने यातायात पुलिस द्वारा गलत दिशा में वाहन चलाने वालों पर जुर्माना बढ़ाकर एक हजार करने पर भी सवाल उठाया।
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मौके पर ही चालकों का चालान करें

हाईकोर्ट - फोटो : file photo
अदालत ने पूछा कि क्या उसने इस संबंध में वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार किया है। अदालत ने कहा कि पुलिस ने केवल सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के गेट पर इसके बारे में सूचनात्मक बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली।

पुलिस ने सब यह दर्शाने के लिए किया है ताकि जज इसे देख सकें। आप इस बारे में व्यापक रूप से समाचार पत्रों व फिल्म के जरिये जागरूकता अभियान चलाएं और मौके पर ही चालकों का चालान करें।

खंडपीठ ने कहा कि पुलिस को पेड़ के पीछे छुपकर यातायात नियम तोड़ने वालों की धरपकड़ करने के बजाय सड़कों पर और मुस्तैद होना चाहिए। अदालत ने यातायात पुलिस अधिकारियों को ये निर्देश दिया कि वह इस बारे में अदालत में रिपोर्ट पेश करें कि नियंत्रण कक्ष से वह किस तरह राजधानी के यातायात पर नजर रखते हैं। अदालत ने कहा कि इससे उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि  पुलिस ने यातायात सुचारू रूप से चलाने व यातायात व्यवस्थित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाएं हैं।

सुनवाई के दौरान यातायात पुलिस ने अदालत को बताया कि उन्होंने दो माह के भीतर गलत दिशा में चलने पर 41 हजार वाहन चालकों के चालान काटे हैं। वहीं, चालान की रकम बढ़ाने के बारे में जगह-जगह बोर्ड लगाए गए हैं।
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पुराने पेड़ों को रखें सुरक्षित

जाम - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली सरकार ने इंडिया काउंसिल ऑफ फोरेस्ट्री रिसर्च एंड एजूकेशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पुराने पेड़ों को ग्लोबल वार्मिंग के मद्देनजर सुरक्षित रखना चाहिए।

क्योंकि इन पेड़ों की जड़ों में अधिक कार्बन होता है। ऐसे में खंडपीठ ने कहा कि उसे पहले बताया गया था कि पुराने पेड़ ऑक्सीजन के बजाय अधिक कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। ऐसे में पूर्व में दी गई उनकी जानकारी ठीक नहीं थी।

अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह अब तक उनके द्वारा वन संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों के बारे में रिपोर्ट दायर करें। इसके अलावा ऑनलाइन पेड़ों को काटने की अनुमति के बारे में क्या प्रक्रिया है यह भी बताए।

सुनवाई के दौरान इस मामले में नियुक्त न्यायमित्र ने कहा कि उन्हें एक बड़े निजी अस्पताल के डॉक्टर ने बताया है कि पिछले कुछ सालों में पांच से दस साल की उम्र वाले बच्चों की सर्जरी की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। बच्चों को वायु प्रदूषण होने के चलते अधिक बीमारियां घेर रहीं हैं। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को तय की है।
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