एनजीटी अध्यक्ष प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अध्ययन के अनुसार, सबसे अधिक भारी धातु जोखिम सूचकांक (एचईआई) लुधियाना (21.78) में पाया गया, उसके बाद पूर्वी दिल्ली (21.45) और पंचकूला (10.74) का स्थान रहा। पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यह बात उजागर हुई है कि इन प्रदूषकों के प्राथमिक स्रोतों में औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों से निकलने वाला धुआं और निर्माण गतिविधियां शामिल हैं।
पीठ ने कहा कि रिपोर्ट में वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम व पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। ऐसे में अदालत डीपीसीसी, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सदस्य सचिवों, पूर्वी दिल्ली और लुधियाना के जिलाधिकारियों और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के जयपुर क्षेत्रीय कार्यालय को पक्ष या प्रतिवादी बनाती है। एनजीटी ने कहा कि प्रतिवादियों को अगली सुनवाई की तारीख छह फरवरी से कम से कम एक सप्ताह पहले न्यायाधिकरण के सामने हलफनामे के जरिए अपना जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी करती है।