फरीदाबाद में बिजली चोरी रोकने के लिए बिजली निगम ने करोड़ों रुपये की लागत से पिलर बॉक्स योजना तैयार की थी।
लेकिन जयपुर की जिस निजी कंपनी को योजना का काम सौंपा गया था उसने आधी लागत लेने के बाद कर्मचारी न होने की बात कहकर प्रोजेक्ट से अपना हाथ खींच लिया है।
इसके बावजूद बिजली निगम के अफसर कंपनी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जनवरी से शुरू हुई योजना इस समय दम तोड़ चुकी है।
बिजली निगम के मुताबिक अब तक सिर्फ 38 पिलरों पर काम हुआ है। कंपनी ने ओल्ड फरीदाबाद के सेक्टर-18 और बदरपुर बॉर्डर से सटे कुछ क्षेत्रों में काम शुरू किया था।
क्या है पिलर बॉक्स
पिलर बॉक्स को सामान्य भाषा में मीटरों की अलमारी कहा जाता है। एक पिलर बॉक्स में आठ से दस मीटरों को रखा जाता है जिन्हें एक ही लॉक में बंद कर दिया जाता है। इससे बिजली चोरी नहीं होती और मीटरों के साथ कोई तकनीकी छेड़छाड़ नहीं होगी। रीडिंग सही होती।
करोड़ों की थी योजना
बिजली निगम ने इसके लिए 14 करोड़ रुपये का बजट पास किया था। योजना के अंतर्गत खंभे बिजली निगम देता। लेकिन कंपनी द्वारा काम रोकने की वजह से काम ढंग से शुरू ही नहीं हुआ।
हरियाणा पावर कॉरपोरेशन यूनियन के सर्किल सचिव लज्जाराम ने बताया कि इस बारे में अधिकारियों से बात की गई है। एसई, एक्सईएन से शिकायत की गई है।
बिना काम किए ही कंपनी को सात करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। यह अपने आप में बिजली निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है।