आबकारी नीति मामले में आरोपी आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह की ओर से वकील ने शनिवार को अदालत में कहा कि दिल्ली उत्पाद शुल्क घोटाले से संबंधित धनशोधन मामले में जांच पूरी हो चुकी है। ऐसे में उन्हें आगे हिरासत में रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा। वकील ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह तर्क रखा।
राउज एवन्यू के विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल के समक्ष वकील ने कहा कि आगे की जांच के लिए संजय सिंह की जरूरत नहीं है और उनके खिलाफ जांच खत्म हो चुकी है। वहीं, ईडी ने कहा कि जांच जारी है और अगर संजय सिंह को जमानत पर रिहा किया गया तो वह जांच में बाधा डाल सकते हैं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान उनके खिलाफ पांचवीं पूरक अभियोजन शिकायत दायर की गई।
संजय सिंह ने बुधवार को जमानत याचिका दायर की थी। संजय सिंह ने कहा कि उन्हें फर्जी मामले में फंसाया गया है। इस मामले में दाखिल चार आरोप पत्रों में उनका नाम नहीं है, लेकिन अचानक उन्हें मुख्य साजिशकर्ता बता दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके देश छोड़कर भागने की कोई आशंका नहीं है, समाज में उनकी प्रतिष्ठा है।
बुधवार को राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल के समक्ष आबकारी नीति मामले में गिरफ्तार सांसद संजय सिंह के वकील ने उनकी ओर से पक्ष रखा। वहीं न्यायाधीश ने इसी मामले के आरोपी शराब की दिग्गज कंपनी पेरनोड रिकॉर्ड के अधिकारी बिनॉय बाबू को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
सांसद सिंह के वकील ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल जमीन से जुड़े नेता हैं जो कभी देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकते। समाज में उनकी प्रतिष्ठा है। वकील ने कहा कि 15 महीने तक जांच एजेंसी ने एक बार भी मेरे द्वारा जांच या सबूत को प्रभावित करने की बात नहीं कही है। उस दौरान कोई पूछताछ नहीं की गई। उस दौरान कोई आरोप भी नहीं लगाया गया। यहां तक कि इस मामले में दाखिल चार आरोप पत्रों में उनका नाम नहीं है, लेकिन अचानक उन्हें मुख्य साजिशकर्ता बता दिया गया है।