इंदिरापुरम के कनावनी गांव में अंगीठी जलाकर सो रहे एक ही परिवार के चार लोगों की हालत बिगड़ गई। हालत बिगड़ने के बाद चारों को शुक्रवार को संयुक्त जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिला की हालत अधिक गंभीर होने की वजह से वहां से उसे दिल्ली के जीटीबी अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती दोनों बच्चों की हालत सामान्य है। वहीं, पिता अभी भी बेहोशी की हालत में है।
संयुक्त जिला अस्पताल में शुक्रवार की सुबह 8:30 बजे एंबुलेंस से मनीष (35) उसकी पत्नी आसमानी (36) बेटा कृष्णा (10) और नौ वर्षीय बेटी दीपाली को भर्ती कराया गया। मनीष के पिता रामजी ने बताया कि रात को आंगन में सभी आग सेक रहे थे, फिर सब अपने-अपने कमरों में सोने चले गए। बेटा मनीष ने आग के तसले को अपने 10 बाई 10 के कमरे में रख लिया था।
सुबह लगभग पांच बजे उठे, उस बीच बच्ची दीपाली की लगातार पानी मांगने की आवाज आने लगी। जब दरवाजा खटखटाया तो न किसी की आवाज आई और न ही दरवाजा खुला। जब गली में जाकर खिड़की खोली गई तब दिखा कि सभी बेहोश पड़े हैं। इसके बाद मकान मालिक और अन्य लोगों ने मिलकर हथौड़े से गेट तोड़ा और एंबुलेंस को बुलाकर उनको अस्पताल पहुंचाया गया। डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि सभी में कार्बन मोनोक्साइड की प्वाइजनिंग पाई गई है। महिला में एसपीओ दो की मात्रा काफी हो रही थी, इसलिए रेफर किया गया। युवक को ऑक्सीजन पर रखा गया है।
डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि रात भर कमरे के अंदर अंगीठी या हीटर जलाकर सोने से जहरीली गैस निकली है। कमरे में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है और कार्बन मोनोक्साइड की मात्रा बढ़ जाता है। यह गैस सीधे दिमाग पर असर करती है और नींद में ही मौत हो जाती है। इसलिए कमरे में रात भर के लिए हीटर, अंगीठी, खासकर कोयले वाली अंगीठी जलाकर ना सोएं। अंगीठी जलाते वक्त कमरे की खिड़की या दरवाजा खुला रखें।