देर रात स्टेशन पर ऐसे व्यक्ति को बुलाना जो पहले ही यौन उत्पीड़न कर चुका हो, असामान्य सा लगता है। उसी के साथ होटल के एक कमरे में रहना व दुष्कर्म का आरोप संदिग्ध है।
अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए दुष्कर्म के आरोपी इंजीनियरिंग छात्र को बरी कर दिया। द्वारका अदालत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश विरेंद्र भट्ट ने कहा कि चेन्नई में इंजीनियरिंग छात्रा ने शिकायत में कहा है कि उसकी आरोपी छात्र अभिषेक से दोस्ती हो गई थी।
अभिषेक भी चेन्नई में इंजीनियरिंग कर रहा था। छात्रा का रिश्ते में भाई भी वहीं रह रहा था। एक बार आरोपी ने उसे अकेला पाकर गलत व्यवहार किया था।
फोटो से ऐसा नहीं लगता कि वह जबरन खींची गई है
अगस्त 2011 को वह दोबारा चेन्नई अपने दस्तावेज लेने गई तो आरोपी उसे होटल ले गया और बस न मिलने का बहाना कर उसी के कमरे में रुक गया। रात्रि में दुष्कर्म किया व अश्लील फोटो लेकर ब्लैकमेल करता रहा।
इसके बाद दिल्ली आने के बाद भी उससे छह माह दुष्कर्म करता रहा। इतना ही नहीं आरोपी नौकरी के लिए अजमेर गया व फिर उसे वहां वीडियो देने के बहाने बुलाकर दुष्कर्म किया।
अदालत ने कहा पेश फोटो से ऐसा नहीं लगता कि वह जबरन खींची गई है।
देर रात चेन्नई पहुंची तो आरोपी को ही बुलाया
इसके अलावा रेल की हर टिकट पर स्टेशन पर ट्रेन पहुंचने का समय अंकित होता है। जिस ट्रेन में वह गई वह चेन्नई देर रात ही पहुंचती है। ऐसे में शिकायतकर्ता ने अपने भाई व महिला मित्र की अपेक्षा आरोपी को ही बुलाया।
स्पष्ट है कि वह उसके साथ होटल में रहना चाहती थी। साक्ष्यों से स्पष्ट है कि उसने आरोपी से अपनी इच्छा से संबंध बनाए। इसके अलावा एक भी साक्ष्य नहीं है कि आरोपी ने कभी भी विवाह की बात की हो।
ऐसे में वे आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करते हैं।