हाईकोर्ट के जमीन अधिग्रहण अधिसूचना रद्द करने से बिल्डरों को भारी झटका लगा है। दूसरी ओर, तकरीबन 9 गांवों के करीब सौ किसानों की बांछे खिल गई हैं।
अब उन्हें अपनी जमीन के एवज में मुंह मांगा रेट मिलने की संभावना बढ़ गई है। अभी इन गांवों में बाजार रेट प्रति एकड़ करीब 10 करोड़ रुपये है।
जबकि, बिल्डरों को अपनी जरूरत के हिसाब से जमीन लेने के लिए इससे भी अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
गौरतलब है कि साल 09-10 को गुड़गांव के कई गांव के आसपास नए सेक्टरों की सड़कों के लिए सरकार ने एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से करीब 9 गांवों के 90 एकड़ जमीन का अधिग्रण किया था।
लेकिन इसके विरोध में किसान हाईकोर्ट में चले गए थे। उनका आरोप था कि उनकी जमीन सड़क से अधिक अधिग्रहीत की गई है। ताकि, बिल्डर कंपनियों के प्रोजेक्ट बिल्कुल सड़कों के करीब लाए जा सके। इससे उन्हें मोटी कमाई होती।
जबकि, 90 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने की कोई जरूरत नहीं थी। इससे प्रभावित किसानों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के आदेश रद्द होने से उन्हें काफी फायदा होगा।
मैदावास के हरि ठाकरान का कहना है कि यदि बिल्डरों को वास्तव में जमीन की जरूरत है तो वह उन्हें मुंह मांगी कीमत अदा करने को तैयार रहें। दूसरे उनकी जमीन आजाद होने से वह उस बेशकीमती जमीन का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।