नगर निगम के दर्जन भर से अधिक पार्षद इस समय विधायक बनने का ख्वाब देख रहे हैं। वे अलग-अलग पार्टियों से टिकट का दावा कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा की बंपर जीत के बाद सबसे अधिक दावेदारी भाजपा से ही हो रही है।
राजनीति के मामले में नगर निगम की जमीन काफी उर्वर रही है। निगम सदन से ही नेतागिरी करके इन दिनों कृष्णपाल गुर्जर केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं जहाजरानी राज्यमंत्री हैं, जबकि शिवचरण लाल शर्मा हरियाणा सरकार में श्रम, रोजगार एवं जनसंपर्क राज्य मंत्री और शारदा राठौर मुख्य संसदीय सचिव हैं। ये सभी लोग प्रदेश के सबसे पुराने फरीदाबाद नगर निगम में पार्षद रह चुके हैं।
राजनीति की दुनिया में इन लोगों की तरक्की देखकर ही निगम के कई वर्तमान और पूर्व पार्षदों ने विधानसभा चुनाव के लिए टिकट की दावेदारी की है। कुछ कांग्रेसी पृष्ठभूमि के पार्षद तो अब कमल के फूल में बदल चुके हैं। मकसद साफ है उन्हें टिकट का लालच है।
दूसरी ओर, नगर निगम के मेयरों को राजनीति में कोई तरक्की नहीं मिली। ज्यादातर को टिकट नहीं मिली और जिनको मिली, उन्हें जनता ने नकार दिया। एक तरह से उनका राजनीतिक करियर खत्म हो गया। इसलिए डिप्टी मेयर राजेंद्र भामला का कहना है कि वह तो मेयर कभी नहीं बनना चाहेंगे, क्योंकि मेयर बनने वाले आगे नहीं बढ़े।
विधानसभा टिकट के दावेदार पार्षद
जगन डागर-आम आदमी पार्टी, एनआईटी से
धर्मवीर खटाना-भाजपा, बल्लभगढ़ से
राम रामकुमार-भाजपा, बल्लभगढ़ से
अजय बैसला-भाजपा, तिगांव से
ओम प्रकाश रक्षवाल-भाजपा, तिगांव से
डिप्टी मेयर राजेंद्र भामला-कांग्रेस, सोहना से
सतीश चंदीला, भाजपा, बड़खल से
पूर्व पार्षद सीमा त्रिखा-भाजपा, बड़खल से
पूर्व पार्षद प्रवेश मेहता-भाजपा, फरीदाबाद शहरी से
पूर्व पार्षद धनेश अदलखा-भाजपा, फरीदाबाद शहरी से
कुलदीप तेवतिया-भाजपा, फरीदाबाद शहरी से
-पूर्व पार्षद सुरेंद्र तेवतिया, भाजपा, बल्लभगढ़ से
मेयर: जिनको नहीं मिली तरक्की
सूबेदार सुमन, देवेंद्र भड़ाना, अनीता गोस्वामी, डॉ. अतर सिंह, ब्रह्मवती खटाना। वर्तमान मेयर अशोक अरोड़ा भी दौड़ में हैं। देखना यह है कि क्या वह पूर्व मेयरों के बारे में मिथक तोड़ पाते हैं। अरोड़ा बड़खल सीट से टिकट मांग रहे हैं, जो प्रदेश सरकार में कद्दावर मंत्री महेंद्र प्रताप सिंह की सीट है।