हरीश राणा की फाइल फोटो
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बेटे के निधन से पहले मां की प्रार्थना
हरीश की मां अस्पताल के गलियारे में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ कर रही थीं। बेटे के निधन से पहले मां ने भावुक होकर अपनी बात कही थी। उन्होंने कहा था कि मेरा बेटा सांस ले रहा है। उसकी धड़कन अभी भी चल रही है। मां ने यह भी कहा कि वह मुझे छोड़कर जा रहा है।
इच्छामृत्यु की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छामृत्यु की इजाजत मिलने के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई थी। हरीश राणा 13 साल से कोमा में थे। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रही थी। एक सप्ताह तक बिना भोजन और पानी के रहने के बाद उनका निधन हुआ। यह एक जटिल और संवेदनशील मामला था।
बेटे हरीश के साथ मां (फाइल फोटो)
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यह है मामला
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है।
बेटे हरीश के साथ माता-पिता (फाइल फोटो)
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इस स्थिति में उसके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए। हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी।