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पढ़िए क्यों हरीश को पिता मानते हैं ये विकलांग बच्चे

Sun, 15 Jun 2014 04:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजला, गुड़गांव
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गुड़गांव के हरीश कक्कड़ अक्षम बच्चों के देखरेख कर पिता का फर्ज निभा रहे हैं।
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बजाज ऑटो में जनरल मैनेजर पद पर तैनात हरीश दो दशक से ज्यादा समय से सैकड़ों मानसिक रूप से अक्षम बच्चों की परवरिश कर रहे हैं।

आश्रमों में रहने वाले ये बच्चे अब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। वह आश्रमों में जाकर उनकी जरूरतों का ख्याल रखते हैं।

1993 में उन्होंने अशक्त बच्चों की दुर्दशा को देख आश्रम में जाकर ऐसे जरूरतमंदों के मदद की ठानी। तब से यह सिलसिला जैसे शुरू ही हो गया। आश्रम में कई बच्चे हरीश को पापा बोलते हैं और कुछ भइया कहते हैं।

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हरीश भी उनका बड़े भाई और पिता के तरह ही ख्याल रखते हैं। हर गुरुवार व रविवार को जाकर उन्हें नहलाना, खाना खिलाना, तेल मालिश करना आदि उनके जीवन का हिस्सा बन गया है।
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बच्चे भी बेहिचक फरमाइश करते हैं और हरीश उनकी मांग को जाया नहीं होने देते। उनकी हर छोटी बड़ी मांग को हर वक्त पूरा करने की कोशिश करते हैं और आर्थिक रूप से भी मदद करते हैं।
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हरीश कहते हैं कि उन्हें अब उनके बिना चैन नहीं मिलता है। मानसिक अक्षम होने के बावजूद बच्चों को भी काफी लगाव हो गया है।

वह बताते हैं कि कई बार घर वाले मना करते हैं कि छुट्टी के दिन घर में बच्चों के साथ बिताएं, लेकिन बच्चों की खिदमत किए बिना नहीं रह पाते।

अब धीरे-धीरे परिवार के लोग भी इसमें शामिल होने लगे हैं। पत्नी पूजा भी अब आकर बच्चों की सेवा करती है। बता दें कि हरीश के दो बच्चे भी है। एक का नाम करन और दूसरे का नाम अर्थव है।
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