स्मार्ट सिटी के चयन में साइबर सिटी की अनदेखी के बाद से सीएम मनोहरलाल अब तक डैमेज कंट्रोल में ही लगे हुए हैं। लगातार किसी न किसी तरह वह यह जताने और बताने में जुटे हैं कि उन्हें गुडग़ांव की काफी चिंता है लेकिन जनता और विपक्षी नेता हैं कि मानने के लिए तैयार नहीं।
शनिवार को सीएम बड़ा दिल दिखाते हुए इस शहर की सफाई व्यवस्था देखने निकले, ताकि शहर के लोगों को लगे कि सरकार गुडग़ांव को लेकर इतनी संजीदा है कि खुद मुख्यमंत्री सफाई व्यवस्था देखने पहुंच गए।
लेकिन विपक्षियों ने इस कोशिश की यह कहकर हवा निकाल दी कि सफाई व्यवस्था देखनी ही थी तो सीएम साहब चुपके से औचक निरीक्षण करते। आप तो वहां साफ-सफाई का हाल देखने गए जहां पर अधिकारी आपको ले गए।
इससे पहले सीए म मनोहर लाल गुडग़ांव में ग्रीवेंस कमेटी की चेयरमैनशिप कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ से छीनकर अपने हाथ लेकर विपक्षियों का मुंह बंद करने कोशिश की थी।
गुडग़ांव को छोड़ स्मार्ट सिटी में करनाल और फरीदाबाद के चयनित होने के बाद सीएम जिस भी औद्योगिक मंच पर गए यह सवाल उठाया गया। इसलिए औद्योगिक संगठनों का मुंह बंद करने के लिए मजबूरी में ही सही उन्होंने ग्लोबल इन्वेस्टर मीट दिल्ली या चंडीगढ़ में करवाने की जगह गुडग़ांव को चुना।
लेकिन गुडग़ांव के उद्यमी किशन कपूर कहते हैं कि इन्वेस्टर मीट गुडग़ांव में करवाना सरकार की मजबूरी है क्योंकि यह शहर विश्व मानचित्र पर है। प्रदेश का सबसे ज्यादा 70 फीसदी निवेश यहीं हुआ है।
अब मुख्यमंत्री गणतंत्र दिवस पर झंडारोहण करने भी यहीं आ रहे हैं। इससे पहले उन्होंने गुडग़ांव के विकास के लिए सभी विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर रुके काम पूरे करने और इसे चमकाने के निर्देश दिए थे।
गुडग़ांव हरियाणा का एक हिस्सा है। यह मेरा शहर है। इसलिए मैं कभी भी यहां आ-जा सकता हूं।-मनोहरलाल, मुख्यमंत्री (पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस में पत्रकारों से बातचीत में)
स्मार्ट सिटी में हुई अनदेखी की भरपाई सिर्फ गुडग़ांव आने-जाने भर से ही नहीं हो सकती। सरकार ओल्ड गुडग़ांव से लेकर मानेसर तक मेट्रो ले जाए, जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाए तब कुछ होगा। साफ-सफाई का निरीक्षण सीएम का नहीं अफसरों का काम है। -गोपीचंद गहलौत, पूर्व उपाध्यक्ष, हरियाणा विधानसभा।