- घटना को सोचकर आज भी सिहर जाता है मासूम, दरिंदों के खिलाफ कोर्ट में लिखकर दिए थे बयान
- गला रेते जाने के कारण आज भी ढंग से नहीं बोल पाता मृतका का छोटा भाई
हापुड़ में ग्यारह वर्षीय मासूम आज भी उस मंजर को सोचकर सिहर उठता है, जब उसकी बड़ी बहन के साथ दरिंदों ने दरिंदगी के बाद हत्या कर दी थी। राज न खुले इसके लिए उसका भी चाकू से गला रेतकर हत्या का प्रयास किया था। मामले में इसी चश्मदीद की गवाही दरिंदों के लिए फांसी का फंदा बनी। कोर्ट ने गवाही को अहम मानते हुए आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई।
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घटना के बाद मृतका के भाई की श्वांस नली और आवाज वाली नली काफी कटी हुई थी। उसे गंभीर हालत में नगर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब तीन घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान कृत्रिम श्वांस नली डालकर उसकी श्वांस नली और खाने की नली को फिर से जोड़ा गया।
इसके बाद उसे मेरठ और फिर दिल्ली इलाज के लिए भर्ती कराया गया। कुछ माह पहले ही वह घर आया है और उसकी इलाज अभी भी चल रहा है। गंभीर बात यह है कि मासूम अभी भी सही ढंग से बोल नहीं पाता है। लेकिन उसकी आंखों में पूरा मंजर साफ पढ़ा जा सकता है।
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घटना के वक्त उसने दोनों आरोपियों को बहन के साथ दरिंदगी करते हुए देख लिया था। शोर मचाया तो आरोपियों ने उसे भी दबोच लिया और धारदार हथियार से गला रेत दिया। आरोपियों ने उसे मरा समझ छोड़ दिया था। लेकिन वह किस्मत से बच गया।
जब उससे घटना के बारे में पूछने का प्रयास किया गया तो घटना की दहशत उसकी आंखों में साफ देखी जा सकती थी। सही से न बोलने के चलते कोर्ट में भी मासूम ने लिखित में बयान दिए। इसी को कोर्ट ने दरिंदों के खिलाफ अहम सबूत मानते हुए फांसी की सजा सुनाई।