सिमी के अन्य सदस्य ऐसे हुए गिरफ्तार
सिमी के पदाधिकारी दिल्ली के जामिया नगर में अपने मुख्यालय के पास एक संवाददाता सम्मेलन को 27 सितंबर, 2001 को संबोधित कर रहे थे तभी पुलिस ने छापा मारकर कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। कई सिमी कैडर घटनास्थल से फरार हो गए थे। संगठन मुख्यालय से सिमी पत्रिकाएं (इस्लामिक मूवमेंट), फ्लॉपी में ऑडियो/वीडियो, सिमी पोस्टर, कंप्यूटर, फोटो एलबम के रूप में आपत्तिजनक सामग्री और उत्तेजक साहित्य बरामद किया गया था।
सिमी का अंसार बन गया था हनीफ
हनीफ शेख ने वर्ष 1997 में मारुल जलगांव से शिक्षा में डिप्लोमा किया। वह 1997 में सिमी संगठन में शामिल हो गया। इसके बाद ये सिमी का अंसार (पूर्णकालिक कार्यकर्ता) बन गया। सिमी कार्यकर्ताओं के संपर्क में आने के बाद वह अत्यधिक कट्टरपंथी बन गया। सिमी संगठन में शामिल होने के बाद हनीफ शेख ने सिमी के साप्ताहिक कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू कर दिया और मुस्लिम युवाओं को संगठन में शामिल करने के लिए कट्टरपंथी बनाना भी शुरू कर दिया।
पत्रिका का संपादक बना दिया
हनीफ के प्रबल उत्साह से प्रभावित होकर सिमी के तत्कालीन अध्यक्ष साहिद बदर ने वर्ष 2001 में हनीफ शेख को सिमी पत्रिका इस्लामिक मूवमेंट के उर्दू संस्करण का संपादक बनाया। उन्होंने उक्त पत्रिका में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों को गलत तरीके से उजागर करते हुए कई उत्तेजक लेख लिखे थे। हनीफ शेख का सफदर हुसैन नागोरी, अब्दुस शुभान कुरेशी उर्फ तौकीर, नोमान बदर, शाहनाज हुसैन, सैफ नाचैन, मोहम्मद के साथ घनिष्ठ संबंध थे।
नया संगठन बनाया गया
समय बीतने के साथ वरिष्ठ सदस्यों ने वहादत-ए-इस्लाम के नाम और शैली में नए संगठन की स्थापना की। इस संगठन के अधिकांश सदस्यों की पृष्ठभूमि सिमी से ही था। इस संगठन का मूल एजेंडा मुस्लिम युवाओं को एकजुट करना और कट्टरपंथी इस्लाम के सिद्धांत का प्रचार करना भी है।आरोपी हनीफ शेख वहादत-ए-इस्लाम के थिंक टैंक सदस्यों में से एक है और महाराष्ट्र और अन्य आसपास के राज्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। वह प्रतिबंधित संगठन सिमी के साथ-साथ वहादत-ए-इस्लाम के एजेंडे के समर्थन और वित्तपोषण के लिए दान की आड़ में धन एकत्र करने में भी शामिल है। इसके खिलाफ पहले से चार आपराधिक मामले दर्ज हैं।