हाई प्रोफाइल सीट और मोदी फैक्टर का असर लोगों के दिलों पर भारी पड़ा। लोगों ने बाहरी प्रत्याशी होने को सिरे से नकार दिया और गाजियाबाद के इतिहास में ऐतिहासिक जीत दर्ज कराई।
मोदी फैक्टर और अपनी छवि के चलते ही जनरल पहले चरण से लेकर अंतिम 28 वें चरण तक बढ़त बनाते गए। दिग्गजों की टीम जनरल की राह नहीं रोक सकी। कई राजनीतिज्ञों की चुनावी सभाओं में भीड़ जुटी, लेकिन उसको वोट में तब्दील नहीं करा पाए।
जनरल वीके सिंह के पहली बार गाजियाबाद आगमन पर जबरदस्त विरोध हुआ था। उन पर बाहरी होने का आरोप लगाते हुए खुद पार्टी के नेताओं ने ही स्थानीय होने का नारा बुलंद किया था।
निवर्तमान सांसद राजनाथ पर क्षेत्र में न आने और विकास न कराने का आरोप लगाते हुए वीके सिंह की बजाय किसी स्थानीय व्यक्ति को टिकट देने की मांग की गई थी।
एक ओर पार्टी के नेता जहां बाहरी का आरोप लगा उनका विरोध कर रहे थे तो दूसरी ओर राजबब्बर और शाजिया इल्मी जैसे दिग्गज उनकी राह रोक रहे थे। सुधन रावत के पक्ष में मुख्यमंत्री और आजम खां ने सभाएं की, तो मुकुल उपाध्याय के लिए मायावती ने जनसभा की।
इनमें भारी भीड़ भी जुटी। लेकिन मोदी लहर और हाईप्रोफाइल सीट के साथ जनरल की छवि ने बाहर का मुद्दा बाहर कर दिया। यही कारण रहा कि लोगों ने उनको ऐसा समर्थन दिया।