नोटबंदी के फैसले के बाद शहर में नकदी की किल्लत बरकरार है। साइबर सिटी को रोजाना की जरूरत के मुताबिक नकदी देने में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) फेल रहा है। आरबीआई चंडीगढ़ क्षेत्रीय मुख्यालय द्वारा गुरुग्राम को अब तक केवल 203.17 करोड़ रुपये ही दिए गए हैं।
बाकी बैंकों ने खुद अपने करेंसी चेस्ट या दूसरे प्रदेशों से मंगाकर लोगों को बांटे हैं। गुरुग्राम में 44 बैंकों की 715 शाखाओं द्वारा अब तक 1103.33 करोड़ रुपये बांट दिए गए हैं। बता दें कि हरियाणा के सभी शहरों को नकदी देने की जिम्मेदारी आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय की है।
नोटबंदी के फैसले के बाद जिले में नकदी की मांग और आपूर्ति की खाई बढ़ती जा रही है। लगातार मांग के बीच बैंक भी कैशलेस हो रहे हैं। शहर के लिए न्यूनतम 2300 करोड़ की जरूरत है, लेकिन बैंकों को केवल 550 करोड़ रुपये मिल रहा है। ऐसे में लोगों की जरूरत पूरी करने के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
44 बैंकों के हर बैंक को करीब 2.65 करोड़ रुपये रोजाना की जरूरत है, लेकिन बैंकों को औसत 83 लाख रुपये ही मिल रहे हैं। लगातार बैंकों की आपूर्ति कम होने के बाद इस मामले को लेकर जिला अग्रणी बैंक के मैनेजर ने आरबीआई को पत्र लिखकर नकद आपूर्ति को बढ़ाने की मांग की है।
अग्रणी बैंक के मुताबिक साइबर सिटी को हरियाणा के 16 जिलों के मुकाबले रकम की जरूरत है, लेकिन यहां आपूर्ति जरूरत के मुताबिक केवल 10 फीसदी है। अग्रणी बैंक के मैनेजर आरसी नायक का कहना है कि आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक लेनदेन गुरुग्राम में है। यहां पर हर दिन की जरूरत हरियाणा के 10 जिलों के बराबर है।
करेंसी चेस्ट भी हो रहे हैं खाली
जिले के छह करेंसी चेस्ट बैंक एचडीएफसी, पीएनबी, एसबीआई, ओबीसी, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक, कॉरपोरेशन बैंक के पास 3345 करोड़ रुपये रखने की क्षमता है। इन बैंकों के 239 शाखाओं के लिए 720 करोड़ रुपये रोजाना की जरूरत है।
लेकिन शुक्रवार की रिपोर्ट के मुताबिक छह करेंसी चेस्ट बैंकों के पास केवल 15.1 करोड़ रुपये था। एचडीएफसी ने अपनी रिपोर्ट में शून्य दिखाया है, जबकि सबसे अधिक 2000 करोड़ रुपये रखने की क्षमता है। एसबीआई के पास 03 करोड़ रुपये, ओबीसी के पास दो करोड़, कॉरपोरेशन बैंक के पास 5 करोड़ और सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के पास 05 करोड़ रुपये थे।