विपक्षी पार्टियों की आलोचना और कॉरपोरेट वर्ल्ड के दबाव की वजह से गुड़गांव का नाम बदलने के मुद्दे पर राज्य सरकार बैकफुट पर आ गई है। यह हम नहीं, बल्कि राज्य सरकार का राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग लिखित में मान रहा है।
यहां पर नाम बदलने का काम यही विभाग करता है। सूचना अधिकार कार्यकर्ता अभय जैन द्वारा डाली गई एक आरटीआई के जवाब में विभाग के अधिकारियों ने लिखा है कि मुख्यमंत्री ने गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम करने की घोषणा नहीं की थी।
जनता की मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया है, जबकि 12 अप्रैल को सरकार ने बयान जारी कर कहा था कि नाम बदलने के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दी है।
बताया गया था कि संघ और उससे जुड़े संगठनों के दबाव में राज्य सरकार ने यह फैसला किया। इसकी कॉरपोरेट वर्ल्ड ने जमकर आलोचना की थी। सोशल मीडिया पर लोगों ने सरकार पर खूब तंज कसा थे।
इसके बाद सरकार से नजदीकी बढ़ाने के लिए कुछ लोगों ने गुरुग्राम भी लिखना शुरू कर दिया। अब सरकार का एक विभाग ही बिना नोटिफिकेशन के गुरुग्राम लिखने को गलत बता रहा है।
आरटीआई के जवाब ने राजस्व विभाग ने लिखा है कि जब तक सरकार की ओर से अधिसूचना जारी नहीं कर दी जाती, तब तक कोई विभाग रिकॉर्ड में जिले का नाम नहीं बदल सकता।
नाम बदलने पर अजीबोगरीब तर्क
द्रोणाचार्य गवर्नमेंट कॉलेज के आगे भी गुरुग्राम लिख दिया गया है। इसके जवाब में प्रिंसिपल ने कहा कि कॉलेज के बोर्ड पर गुड़गांव का नाम गुरुग्राम पूर्व प्राचार्य डॉ. राम किशन के कार्यकाल में किया गया है।
वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस संबंध में उन्हीं से पूछा जाए। वहीं पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर बिना नोटिफिकेशन के ही गुरुग्राम लिख दिया गया है। वहां भी आरटीआई डाली गई है, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है।