हरियाणा के दिव्यांगजन आयुक्त राज निर्भीक ने कहा कि गुरुग्राम-फरीदाबाद की 90 इमारतों को दिव्यांग फ्रैंडली बनाया जाएगा। जिससे उन्हें यहां पर आने और जाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो। उन्होंने बताया कि इसमें से 42 इमारतें गुरुग्राम जिला में है।
इसके अलावा 20 इमारतों का एस्टीमेट बनाकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को भेजा गया है जिसकी स्वीकृति आने के बाद काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास को बढ़ावा देने का लगातार काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री और कुछ विधायकों की नाराजगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह उनका क्षेत्र नहीं है। संगठन और सरकार अपना-अपना काम कर बेहतर ढंग से कर रहा।
उन्होंने यह बातें शुक्रवार को शहर के सिविल लाइन स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम का लघु सचिवालय, न्यायालय परिसर, बिजली निगम कार्यालय कादीपुर, पुलिस आयुक्त कार्यालय, नागरिक अस्पताल सेक्टर-10ए, जन स्वास्थ्य विभाग व राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् सहित कुछ सहित कई प्राइवेट व सरकारी इमारतों का एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है।
मंजूरी मिलने के बाद यहां भी दिव्यांगों की सुविधा के लिए रैंप सहित अन्य जरूरी निर्माण को कराया जाएगा जिससे दिव्यांगों को परेशानी से बचाया जा सके।
निर्भीक ने कहा कि दिव्यांगों की सुविधा के लिए दिव्यांगता की प्रतिशतता को 70 से घटाकर 60 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा जो लोग अपनी पेंशन को बैंक में आकर लेने में सक्षम नहीं हैं उन्हें घर पर ही पेंशन दी जा रही है। राज्य सरकार की मंशा है कि दिव्यांगों की सुविधा पर खास ध्यान दिया जाए और उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाया जाए।
उन्होंने कहा कि निशक्त लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए जरूरी है कि उनके हित के लिए हम एकजुट होकर काम करें। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार की नीतियां दिव्यांग हितैषी हैं जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि वह संत प्रवृत्ति के व्यक्ति है जो समाज में प्रत्येक व्यक्ति का कल्याण चाहते हैं। दिव्यांगों उच्चशिक्षित दिव्यांगों की नौकरी के लिए भी सरकार से नीति बनाने की मांग की।
निजी स्कूलों द्वारा फीस के मुद्दे पर कहा कि उनकी पोती भी द प्रेजीडियम स्कूल में पढ़ती है। स्कूल प्रबंधन ने जब बढ़ी हुई फीस लेने की बात कही तो उन्होंने इससे मना कर दिया। बिना बढ़ी फीस दिए ही उसका दाखिला कराया। उन्होंने कहा कि वह खुद एक अभिभावक हैं। इसलिए अन्य अभिभावकों की चिंता को वह समझ सकते हैं।