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Gurugram News: पारंपरिक कला को नया जीवन दे रहीं महिलाएं, आत्मनिर्भरता की भी बन रहीं मिसाल

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बैग, शीशे की सजावट, झूले, परदे, दीवार सजावट की वस्तुएं समेत कई आकर्षक उत्पाद तैयार कर बन रहीं आत्मनिर्भर
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, लोगों को कर रही आकर्षित
संवाद न्यूज एजेंसी



न्यू गुरुग्राम। महिलाएं पारंपरिक कला और संस्कृति को आधुनिक दौर से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। इससे वे अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। शहर की रहने वाली निर्मला और कविता मैक्रेम आर्ट तथा जूट से बने उत्पादों को जीवित रखने की दिशा में काम कर रही हैं। वे इस कला को नया जीवन देने के साथ-साथ 20 से 25 महिलाओं को इसका प्रशिक्षण भी दे रही हैं।

पिछले 15 वर्षों से मैक्रेम आर्ट से जुड़ी निर्मला ने इस कला से अन्य महिलाओं को भी जोड़ना शुरू किया। वहीं, कविता पिछले करीब छह महीनों से जूट बैग और मैक्रेम आर्ट के उत्पाद तैयार कर रही हैं। इस कला के माध्यम से बैग, शीशे की सजावट, झूले, परदे, दीवार सजावट की वस्तुएं समेत कई आकर्षक उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जो लोगों को इस पारंपरिक कला की ओर आकर्षित कर रहे हैं।ये उत्पाद रेशम, जूट और ऊन जैसी चीजों से तैयार किए जाते हैं, जिससे वे रंग-बिरंगे होने के साथ-साथ टिकाऊ भी होते हैं। खास बात यह है कि इस पूरे काम की शुरुआत घर से हुई थी और आज भी निर्मला और कविता घर से ही अपने व्यवसाय का संचालन कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि यह पारंपरिक कला धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। ऐसे में युवाओं और महिलाओं को इसके जागरूक करने की आवश्यकता है। साथ ही वे प्लास्टिक से बने उत्पादों के उपयोग को कम करने का संदेश भी दे रही हैं।
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इस कला को पिछले 30 वर्षों से जानती हूं। उस समय कुछ मजबूरियों के कारण व्यवसाय शुरू नहीं कर पाई, लेकिन अब करीब छह महीनों से इस काम को कर रही हूं।

- कविता, प्रेमपुरी निवासी


पिछले 15 वर्षों से यह काम कर रही हूं। इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और मैं आत्मनिर्भर बनी हूं। उत्पाद बेचने के साथ-साथ महिलाओं और बच्चियों को प्रशिक्षण भी देती हूं। मेरी इच्छा है कि अधिक से अधिक लोग इस कला को जानें और अपनाएं।



- निर्मला, फिरोज गांधी कॉलोनी निवासी
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