फास्टैग स्कैनर नहीं कर रहा था सही से काम, शिकायतकर्ता से टोल के लिए थे 130 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। टोल पर फास्टैग स्कैनर ठीक से काम न करने पर वाहन चालक को 10 मिनट इंतजार करना पड़ा था। इस मामले में अब टोल प्रबंधक को शिकायतकर्ता को 15 रुपये का मुआवजा देना होगा। यह आदेश उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सदस्य खुशविंदर ने दिया है।
सेक्टर-15 निवासी कुणाल ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि 27 जुलाई 2025 को वह शाम करीब साढ़े बजे वह घामड़ोज टोल पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनकी गाड़ी में लगा फास्टैग मान्य था लेकिन टोल प्रबंधक का स्कैनर ठीक से काम नहीं कर रहा था। इसकी वजह से टोल बूथ से गुजरने में उन्हें करीब 10 मिनट तक का इंतजार करना पड़ा। 10 मिनट के इंतजार के बावजूद टोल प्रबंधक ने 130 रुपये टोल के एवज में उनसे ले लिए।
उन्होंने आयोग में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से सात मई 2018 को जारी किए गए एक दस्तावेज देते हुए बताया कि उसके अनुसार 10 सेकंड से ज्यादा किसी भी वाहन को टोल पर नहीं रोका जाएगा। इस मामले में टोल प्रबंधक की तरफ से कोई भी आयोग में पेश नहीं हुआ है।
आयोग ने दस्तावेज के आधार पर टोल प्रबंधक को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता से लिए गए टोल के रूप में 130 रुपये नौ प्रतिशत की दर से वापस करे। इस दौरान शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी पर 15 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 11 हजार रुपये दिए जाएं।