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एक ऐसी सोसायटी जहां आरडब्ल्यूए कर रही कोरोना मरीजों का इलाज

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पंकज मेहन मिश्रा
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गुरुग्राम। कोरोना महामारी के दौर में संक्रमितों के इलाज के लिए सबसे ज्यादा हाय तौबा मची हुई है। इन सबके बीच सेक्टर-82 व 83 स्थित वाटिका नेक्स्ट सोसाइटी की आरडब्ल्यूए ने कोरोना संक्रमित स्थानीय निवासियों के इलाज का जिम्मा संभाल रखा है। सोसाइटी के लोगों की मदद से ही यह सब संभव हो पाया है। कुछ लोगों ने निशुल्क रूप से थोक में दवाएं उपलब्ध कराईं, जबकि कुछ लोगों ने पीपीई किट देकर सहयोग किया है।
आरडब्ल्यूए के ब्लॉक की तरफ से इस समय सोसाइटी में रहने वाले 14 कोरोना संक्रमितों का निशुल्क इलाज किया जा रहा है, इसमें एक 18 माह की बच्ची भी शामिल है, जो लगभग स्वस्थ हो चुकी है। सोसाइटी की आरडब्ल्यूए की अगुवाई में एक टीम बनाई गई है, उसने मरीजों के इलाज का जिम्मा संभाल रखा है। इस टीम में तीन व्यक्ति स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, इसमें झज्जर एम्स के नर्सिंग ऑफिसर व आरडब्ल्यूए के महासचिव लोकेश यादव, डॉ. संजू कुमारी व एमडी मेडिसिन डॉ. अंशुमन शामिल हैं। वहीं टीम में सोसाइटी के सेक्युरिटी सुपरवाइजर अमरेंद्र, एनवायरो मेंटेंनेंस कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर शक्ति सिंह, रणबीर सिंह, अमित कुमार व एक हाउस बॉय राजेंद्र मेहता भी शामिल हैं।
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इस तरह से चलता है इलाज
आरडब्ल्यूए पहले सोसाइटी वासियों को फोन पर परामर्श देती थी, लेकिन जैसे-जैसे मरीज बढ़ने लगे तो होम आइसोलेशन की व्यवस्था की गई। सोसाइटी में कोविड पॉजिटिव मरीज पाए जाने पर सबसे पहले उसे 14 दिन की मेडिसिन किट देकर आइसोलेट कर दिया जाता है। उसके बाद डॉक्टर मरीजों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनकी नियमित रूप से सुबह शाम स्वास्थ्य की जानकारी लेते रहते हैं। वहीं, मरीजों की मांग के अनुसार हाउस बॉय की तरफ से निशुल्क फल सब्जियों समेत अन्य पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाता है। खास बात यह है कि मरीजों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फेफड़ों की एक्सरसाइज भी कराई जाती है। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं की नोडल ऑफिसर सोनल गोयल की मदद से एमसीजी के जरिए बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण भी विधिवत तरीके से किया जा रहा है।
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आपात स्थिति के लिए भी तैयार आरडब्ल्यूए
सभी मरीजों की स्थिति सामान्य है, लेकिन किसी भी आपात स्थिति के लिए भी आरडब्ल्यूए पूरी तरह से तैयार है। इसके तहत ऑक्सीजन सिलेंडर व मास्क मंगाकर एक निजी वाहन को ही एंबुलेंस बना दिया गया है। कोविड के गंभीर मरीज को भर्ती करने के लिए मानेसर के मीडोर व झज्जर एम्स अस्पताल प्रबंधन से बातचीत भी हो चुकी है।
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