नगीना। अल-आफिया जिला अस्पताल मांडीखेडा में लाख कोशिशों के बावजूद व्यवस्थाएं पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति यह है कि शौचालय पूरी तरह बदहाल हैं। किसी शौचालय का फ्लश टूटा है तो कहीं सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बृहस्पतिवार को विशेष बैठक कर प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में साफ-सफाई सुनिश्चित करने को लेकर अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए थे।
नूंह जिले के जिला अस्पताल की शुक्रवार को पड़ताल करने संवाद की टीम 11 बजे मांडीखेड़ा स्थित जिला नागरिक अस्पताल पहुंची। प्रांगण में साफ-सफाई की हुई थी और कचरा खुले में न फेंका जाए, उसके लिए जगह-जगह कूड़ेदान लगाए गए थे। इसके बाद टीम जनरल वार्ड में पहुंची जहां मरीजों की भीड़ लगी हुई थी। मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे तो कुछ मरीज शौचालयों की तरफ भटक रहे थे। यहां एक तरफ महिला और पुरुष शौचालय पर ताला लगा हुआ था तो दूसरी तरफ शौचालयों के दरवाजे खुले हुए थे। जिनकी स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई थी, दरवाजे टूटे हुए हैं और फर्श पर गंदगी फैली हुई है। बदबू के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। गंदे और बदहाल शौचालयों के कारण उन्हें बड़ी परेशानी झेलनी पड़ती है। खासकर महिला मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा परेशानी होती है। मरीजों के साथ आए सकील, असफाक, निजाम, साकिर, मुबारिक व शौकत ने बताया कि शौचालय में गंदा और बदबूदार पानी जमा होने के कारण मरीज व तीमारदार शौचालय में शौच नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण मजबूरी में उन्हें खुले में शौच जाना पड़ता है, जो स्वच्छ भारत मिशन के लिए एक बड़ी चुनौती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का असर यहां नजर नहीं आता। अस्पताल प्रशासन का ध्यान केवल दफ्तर तक सीमित है, जबकि मरीजों की मूलभूत सुविधाएं उपेक्षित पड़ी हैं।
शौचालय की सफाई व्यवस्था बनी रहती है अगर किसी शौचालय में गंदगी बनी हुई है तो उसकी सफाई जल्द करवाई जाएगी। हमारी कोशिश है कि मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा कुछ शौचालय पर काम चल रहा है वह जल्दी ही तैयार हो जाएंगे।
सर्वजीत थापर, सिविल सर्जन नूंह