हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक तक सड़क को एलिवेटेड बनाने की योजना पर काम कर रहा जीएमडीए
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक तक सड़क को एलिवेटेड बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इस कारण गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) को उद्योग विहार फेज-6 स्थित प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन के डिजाइन में बदलाव करना पड़ सकता है।
सड़क और मेट्रो दोनों के एलिवेटेड होने से स्टेशन निर्माण में तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं। ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के तहत पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक निर्माण कार्य चल रहा है। इसी रूट में हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक तक का मार्ग शामिल है। पहले इस सड़क को छह लेन में विकसित करने की योजना थी लेकिन अब इसे एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में बनाने का प्रस्ताव है। ऐसे में मेट्रो और सड़क के एलिवेटेड कॉरिडोर स्टेशन के पास काफी नजदीक आ रहे हैं।
इस मुद्दे पर जीएमआरएल ने जीएमडीए और एनएचएआई के साथ विस्तार से चर्चा की है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों एलिवेटेड कॉरिडोर में कोई बड़ी समस्या नहीं है लेकिन स्टेशन निर्माण में बाधा आ रही है। ऐसे में किसी एक प्रोजेक्ट के कॉरिडोर में आंशिक बदलाव करना आवश्यक होगा। इस संबंध में जल्द बैठक होने की संभावना है। एनएचएआई ने हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक तक एलिवेटेड सड़क निर्माण के सिविल कार्य के लिए करीब 182 करोड़ रुपये का अनुमान जीएमडीए को सौंपा है। अब इस पर अंतिम निर्णय सरकार को लेना है। इसी मार्ग पर मेट्रो के हीरो होंडा चौक और उद्योग विहार फेज-6 स्टेशन प्रस्तावित हैं। हाल ही में जीएमआरएल के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक में भी इस रोड पर आ रही अड़चनों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। पहले समिति को बताया गया था कि मार्च 2026 तक सभी बाधाएं हटाकर जीएमआरएल को राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) उपलब्ध करा दिया जाएगा। हालांकि, निर्धारित समयसीमा के भीतर आरओडब्ल्यू उपलब्ध नहीं हो सका है। नए बदलाव और आवश्यकताओं के जुड़ने से प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
आरओडब्ल्यू उपलब्धता में देरी के कारण
-कोर्ट केस (बीकानेर मिष्ठान भंडार): मामला न्यायालय में लंबित है, जिससे अतिक्रमण हटाने में बाधा आ रही है।
- एचवीपीएनएल सबस्टेशन: निर्माण कार्य जारी है, जो जून 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
- सीएनजी पंप का स्थानांतरण: मंजूरी मिल चुकी है लेकिन शिफ्टिंग और ढांचा हटाने का काम बाकी है।
-हिमगिरी आश्रम: जमीन खाली कराई जा रही है लेकिन आरओडब्ल्यू का औपचारिक हस्तांतरण लंबित है।
- यूटिलिटी शिफ्टिंग: पानी, सीवर, नाला, बिजली और गैस पाइपलाइन हटाने का कार्य एनएचएआई द्वारा किया जाना है, जो डीएचबीवीएन के कार्य पर निर्भर है।
- वन विभाग की मंजूरी: सेक्टर-10 बस डिपो के पास वन भूमि उपयोग की अनुमति लंबित है।