गुरुग्राम। कपड़ा उद्योग के एमएसएमई को नई तकनीक के प्रयोग से निर्यात और उत्पादों के देश में खपत की बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं। बशर्ते वे नई तकनीक और अनुसंधान पर ध्यान दें और मांग के नए ट्रेंड को अपनाएं। महरौली रोड स्थित जीआईए हाउस में टेक्निकल टेक्सटाइल जागरूकता कार्यशाला में ये बातें विशेषज्ञों ने कहीं। हरियाणा के एमएसएमई निदेशालय और भिवानी के द टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइल एंड साइंसेज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वस्त्र परिधान उद्योग के उद्यमियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पोर्ट्स वियर, मेडिकल टेक्सटाइल, जियो टेक्सटाइल, प्रोटेक्टिव टेक्सटाइल के क्षेत्र भारत के उद्योगों के उत्पादन, नवाचार, अनुसंधान और संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जैन कोर्ड इंडस्ट्रीज के जीएमडी और टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल जैन रहे। जीआईए महासचिव सुमित राव, टेक्सटाइल उद्यमी अरुण जैन, टीआईटी एंड एस भिवानी के निदेशक प्रो. बीके बेहरा, डॉ. यामिनी, डॉ. नागेंद्र सिंह आदि ने विभिन्न विषयों पर वस्त्र उद्योग में तकनीक के विकास की संभावनाओं पर चर्चा की।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि कंपोजिट मटेरियल भविष्य का मटेरियल है। जहां मेटल का प्रयोग हो रहा है, वहां कंपोजिट मटेरियल का प्रयोग किया जाए तो वह वजन में काफी हल्का हो जाता है और इसके उत्पादन में ईधन का प्रयोग काफी कम हो जाता है। मेडिकल क्षेत्र के लिए कई ऐसे टेक्सटाइल प्रोडक्ट हैं जो भारत केवल आयात कर रहा है लेकिन उसमें काफी संभावनाएं हैं, जितने भी प्रमुख स्पोर्टस ब्रांड हैं, उनकी फेब्रिक भारत बनाता है लेकिन विदेश के ब्रांड लगकर वह भारत में बिकता है। देश में स्पोर्ट्स वियर क्षेत्र में तकनीक के प्रयोग और ब्रांडिंग की जरूरत है।