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Gurugram News: घर-घर कूड़ा उठाने वाली गाड़ी का 15 जून से बदल जाएगा सायरन

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नई कंपनी को कूड़ा उठाने का दिया जाएगा काम, सात साल का होगा करार

मयंक तिवारी
गुरुग्राम। साइबर सिटी में कूड़ा उठाने वाली गाड़ी का सायरन 15 जून से बदल जाएगा। कूड़ा उठाने वाली कंपनी का समय पूरा हो रहा है, जिसके चलते नए आवंटन की प्रक्रिया को लेकर सरकार से मंजूरी का इंतजार है।
इस बार होने वाले करार को सात साल का रखा जाएगा। साथ ही भवन मालिक को कूड़े का भुगतान एजेंसी को न करने के बजाय नगर निगम को करना होगा। शहर में गंदगी हटाने की जिम्मेदारी अब सीधे तौर पर नगर निगम की होगी। बीच में एजेंसी की भूमिका खत्म होगी। नगर निगम की ओर से 15 जून को आवंटित होने वाली नई कंपनी के करार के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। यह प्रस्ताव मंजूर होगा, उसके बाद नगर निगम की ओर से इसे शुरू किया जाएगा। निगमायुक्त की ओर से लगातार इस विषय पर बैठक कर सरकार से तालमेल बैठाया जा रहा है। माना जा रहा है कि तीन माह के भीतर सभी कुछ सामान्य हो जाएगा।
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साइबर सिटी की कूड़े की समस्या प्रमुख है। कूड़ा उठाने वाली कंपनी की लापरवाही का असर है कि निगम को इस विषय पर इमरजेंसी लागू करनी पड़ी थी। इसके साथ ही निगम को नई कंपनी से उसकी शर्त पर करार करना पड़ा। जिसका असर अब दिख रहा है। कंपनी उससे 10 करोड़ कैसे वसूलेगी यह तय नहीं हो पा रहा है। इसके लिए वह अदालत में जाने की तैयारी कर रहे हैं। बंधवाड़ी में बना कूड़े का पहाड़ भी सफाई में बाधा पैदा करता है। कारण खत्तों से कूड़ा उठ नहीं पा रहा है। घर-घर से आने वाला कूड़ा खत्तों तक पहुंचाने में समय लगता है। ऐसे में बंधवाड़ी का असर दूर तक दिखता है। वर्तमान में नगर निगम की ओर से विमल राज कंपनी के साथ कूड़ा उठाने का करार है। उसकी ओर से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है। निगम की ओर से अलग-अलग चरणों में 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। कंपनी अंडर ग्राउंड हो चुकी है।
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नगर निगम क्षेत्र से रोजाना 1200 टन कूड़ा निकलता है।



इसे घर-घर से उठाने के लिए 700 गाड़ियों की आवश्यकता है।



नगर निगम की एजेंसी के पास अभी 350 गाड़ियां हैं।



कूड़ा उठाने वाली कंपनी पर 10 करोड़ का जुर्माना



वर्जन

शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें 15 जून से नए टेंडर की प्रक्रिया को लेकर सरकार को लिखा जा चुका है। इसे ठीक होने में तीन माह का समय लगेगा। - प्रदीप दहिया, नगर निगम आयुक्त, गुरुग्राम।
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