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हंगामेदार रही नगर निगम सदन की बैठक

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गुरुग्राम। शहर में विकास कार्य न होने पर आक्रोशित पार्षदों ने शनिवार को सेक्टर-18 स्थित हरियाणा लोक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित नगर निगम सदन की बैठक में जमकर हंगामा किया।
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पार्षदों का आरोप है कि वार्डों में विकास कार्यों के पहले वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए, बाद में उनको निरस्त कर दिया। शहर में थोड़ी सी बारिश होने पर जगह-जगह जलभराव हो रहा है जबकि इस बार जलभराव न होने के अफसरों ने दावे किए गए थे और अफसरों से पूछते हैं तो जवाब नहीं मिलता। बोर्ड बैठक में कई अधिकारी नहीं आए। शहर की स्ट्रीट लाइट खराब हैं और वार्डों में अंधेरा है। उदासीनता और लापरवाही बरतने वाले कई अधिकारियों को निलंबित करने की मांग भी बोर्ड बैठक में की गई। पार्षदों के तल्ख तेवरों को देख मेयर ने भी उनका समर्थन किया।
बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और देर शाम तक तक चली। बैठक में स्ट्रीट लाइट के मुद्दे पर मुखर होते हुए पार्षदों ने कहा कि शुरुआत में स्ट्रीट लाइट लगाने वाली कंपनी ने जो प्रजेंटेशन दिखाई थी, उसको देख लिया जाए तो साफ हो जाएगा कि अब तक धरातल पर कितना काम हुआ है।
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वर्क ऑर्डर जारी कर निरस्त करने का मुद्दा उठाया
बैठक की शुरुआत के कुछ देर बाद ही वार्ड-22 के पार्षद प्रतिनिधि नीरज यादव ने अपने वार्ड में वर्क ऑर्डर जारी कर बिना पार्षद से सलाह मशविरा किए उसे निरस्त करने का मुद्दा उठाया। उन्होेंने कहा कि मई में 12621 नाम से वर्क ऑर्डर जारी किया गया था, जिसे तीन माह में पूरा किया जाना था। उसे न तो पूरा किया गया और न ही इस बारे में स्थानीय पार्षद से कोई सलाह ली गई और बाद में वर्क ऑर्डर निरस्त भी कर दिया गया।
अधिकारी को निलंबित करने की मांग
वार्ड-22 के पार्षद प्रतिनिधि ने जवाब मांगने के साथ ही संबंधित अधिकारी के निलंबन की भी मांग की। उनके सवाल पर निगम अधिकारियों की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। जवाब से असंतुष्टि जाहिर करते हुए उक्त पार्षद प्रतिनिधि के साथ ही अन्य पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। मेयर ने भी पार्षदों की सुर में सुर मिलाते हुए अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
वार्ड-10 की पार्षद ने उठाया जलभराव का मामला
वार्ड-10 की पार्षद शीतल बागड़ी ने बैठक में जलभराव व सामुदायिक केंद्र के निर्माण न होने का मुद्दा मजबूती से उठाया। उन्होंने समस्या के समाधान के लिए एसटीपी और वाटर चैनल की क्षमता बढ़ाने तथा ड्रेनेज के लंबित कार्य को शीघ्र पूरा कराने की मांग की। इसके अलावा उनके क्षेत्र से गुजरने वाले ड्रेनेज का निर्माण कार्य लंबित रखने वाले ठेकेदार युद्धवीर को ब्लैक लिस्टेड कर किसी अन्य ठेकेदार से काम कराने की भी मांग की। उन्होंने निगम समिति और मेयर को दिए पत्र में उल्लेख किया कि वार्ड 10 में ड्रेनेज (जीटी), सीवर लाइनों और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज की सफाई न होने के कारण मानसून के समय में आम नागरिकों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
‘हमें स्ट्रीट लाइट भी भिखारियों की तरह मांगनी पड़ रही’
वार्ड-1 की पार्षद ने स्ट्रीट लाइट लाइट न लगने का मुद्दा उठाया तो सभी पार्षदों ने उनके सुर में सुर मिलाया। पार्षदों ने कहा कि सदन की बैठक में ही सभी वार्डों में 200-200 स्ट्रीट लाइट लगाने की बात कही गई थी लेकिन कहीं पर भी यह काम पूरा नहीं हुआ है। हम पार्षदों को भिखारियों की तरह स्ट्रीट लाइट मांगनी पड़ रही है। इस पर मेयर मधु आजाद ने भी कहा कि संबंधित अधिकारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं है। इस पर सभी पार्षदों ने एकमत होकर अपनी आवाज बुलंद की।
सेक्टर-32 में खड़ा हुआ एक और कूड़े का पहाड़
पार्षद अश्वनी शर्मा ने शहर में स्वच्छ भारत मिशन की नाकामी व बदहाल सफाई व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि निगम के नाकारा अधिकारियों-कर्मचारियों के चलते सेक्टर-32 में एक और कूड़े का पहाड़ खड़ा हो रहा है। उन्होेंने कहा कि हाईवे व झाड़सा के बीच सेक्टर-32 में खाली पड़ी शासकीय जमीन को एक और बंधवाड़ी बना दिया गया है। उन्होंने बादशाहपुर में लगाए गए कंपोस्ट प्लांट का हिसाब मांगते हुए डोर-टू डोर कूड़ा न उठाए जाने की बात कही। अश्वनी शर्मा ने कहा कि सफाई कर्मी जलभराव का बहाना बनाते हुए कहीं पर भी कूड़ा डंप कर रहे हैं। अन्य पार्षदों ने भी अश्वनी शर्मा के मुद्दे पर सहमति जताई।
संयुक्त आयुक्त की कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल
सफाई का मुद्दा उठने पर संयुक्त आयुक्त (स्वच्छ भारत मिशन) धीरज कुमार की कार्यशैली पर भी पार्षदों ने गंभीर सवाल खड़े किए। हरभजन सिंह के साथ उनके संबंधों का उल्लेख करते हुए गड़बड़ियों की आशंका जाहिर की गई। वहीं, संयुक्त आयुक्त धीरज कुमार की गैर मौजूदगी भी बैठक में चर्चा का विषय बनी। इस पर मेयर ने निगमायुक्त से जवाब मांगा और उन्हें बैठक में बुलाने को कहा। इसके साथ ही पार्षदों ने निगम के द्वारा की जा रही फिजूलखर्ची को भी प्रमुखता से उठाया और कहा कि निगम प्रशासन मशीनरी पहले खरीदता है और एनओसी बाद में लेता है। एनओसी न मिलने पर मशीनरी रखे-रखे ही कबाड़ हो जाती है। आखिर ये पैसा किसका है, जिसे पानी की तरह बहाया जा रहा है।
15 दिन में होगा पेड़ों का सर्वे
नगर निगम के सदन की बैठक के दौरान शुरुआत में ही पार्षदों ने पेड़ों की अवैध तरीके से कटाई-छटाई व पेड़ों की गणना करने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इस पर निगमायुक्त ने कहा कि आगामी 15 दिनों में सर्वे कराने के बाद ही पेड़ों की छंटाई नगर निगम के द्वारा कराई जाएगी। निगमायुक्त ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पार्षदों की बिना अनुमति के कहीं पर भी पेड़ न काटे जाएं। वहीं, बिना नगर निगम की अनुमति के पेड़ काटे गए तो निगम प्रशासन संबंधित आरोपियों के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई करेगा। इस संदर्भ में सदन की बैठक में बाकायदा प्रस्ताव पारित किया गया। इसके मुताबिक अवैध रूप से एक पेड़ काटने पर 43 हजार रुपये भरने होंगे।
पार्षद राठी के निधन पर शोक जताया
बोर्ड बैठक के दौरान वरिष्ठ पार्षद आरएस राठी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। इस दौरान पार्षद तथा अधिकारियों ने कहा कि शहर के विकास के लिए उनको याद किया जाता रहेगा।
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