मंदिर को भव्य रूप देने की योजना, 25 हजार गज क्षेत्र में कराया जाएगा निर्माण
दीपक
मानेसर। कासन में स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व काफी पुराना है। वर्ष 1997 में गांव कासन में मंगल नाई के मकान की खुदाई के दौरान मिट्टी के एक मटके से 10 प्राचीन जैन मूर्तियां, दो चरण और दो यंत्र सिंहासन मिले थे। लोगों के मुताबिक कासन में स्थित यह जैन मंदिर आस्था के साथ सेवा का भी केंद्र है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये मूर्तियां लगभग 700 साल पुरानी हैं। मूर्तियों के मिलने के बाद उन्हें कुछ समय के लिए साथ ही के एक मंदिर में सुरक्षित रखा गया। बाद में श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर का निर्माण कर इन मूर्तियों की स्थापना की गई। इससे यह स्थान धीरे-धीरे एक प्रमुख जैन धार्मिक स्थल के रूप में विकसित होने लगा। वर्तमान में देश के अलग-अलग हिस्सों से मानेसर के कासन गांव में भक्त भागवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन के दर्शन करने पहुंचते हैं।
मंदिर के सचिव नरेश कुमार जैन ने बताया कि मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। दूर-दूर से भक्त यहां पर भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन के दर्शन के लिए आते हैं। साल 2015 में 108 उपाध्याय गुप्त सागर जी महाराज के मार्गदर्शन में मंदिर का नव निर्माण कार्य कराया गया। वर्तमान में मंदिर में तीन वेदियां स्थापित हैं, जहां नियमित रूप से इनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
मंदिर को भव्य रूप देने की बनाई जा रही योजना
नरेश जैन ने बताया कि अब इस अतिशय क्षेत्र को और भव्य रूप देने की योजना बनाई जा रही है। 25 हजार गज क्षेत्र में मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इस निर्माण से क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। मंदिर कमेटी की ओर से कासन गांव और आसपास के गांवों के बच्चों के लिए कई सुविधाएं दी गई हैं। मंदिर परिसर में 25 सिलाई मशीन और 12 कंप्यूटर लगाए गए हैं, जहां बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही आसपास के गांवों की बेटियों को कपड़े सिलने का काम सिखाया जाता है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। मंदिर में आंखों का अस्पताल भी है जहां पर लोग अपनी आंखों का इलाज कराने आते हैं।