श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ का किया जलाभिषेक, हर-हर महादेव के जयकारे से गूंजे मंदिर
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सावन की अंतिम सोमवारी पर मंदिरों में श्रद्धा और उत्साह का संगम देखने को मिला। भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति के माहौल में महादेव का पूजन किया। मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए बहुत सारे लोग जोड़े में पहुंचे। सेक्टर-चार स्थित श्रीराम मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर, और भूतेश्वर मंदिर में कई भक्तों ने विशेष रुद्राभिषेक किया। शहर के प्रमुख शिवालयों सिद्धेश्वर मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, घंटेश्वर मंदिर, गीता भवन मंदिर, बाबा प्रकाशपुरी मंदिर, न्यू कॉलोनी स्थित गीता भवन मंदिर में भक्त गंगाजल, फूल, बेलपत्र, दूध, दही, चंदन, हल्दी, कनेर के फूल, धतूरा, भांग, पान, सुपारी, अक्षत आदि से शिव का पूजन किया। मंदिरों में शाम के वक्त भजन कीर्तन का आयोजन किया गया।
बाबा बिसाह मंदिर में भक्त कर रहे हैं दर्शन
कासन के बाबा बिसाह भक्त पूरणमल मंदिर में सावन की अंतिम सोमवार को श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। पूरे सावन यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र रहता है। बाबा बिसाह भक्त पूरणमल बाबा चौरंगीनाथ मंदिर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर गांव कासन में स्थित है। अरावली की पहाड़ी और हरियाली के बीच यह मंदिर का वातावरण काफी सुरम्य है। गांव की पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। गांव के सरपंच सत्यदेव शर्मा के अनुसार, यह मंदिर 250 साल पुराना है। चालकोट के राजा के पुत्र पूरणमल तपस्या के लिए काशी जा रहे थे। वे इस गांव में ठहरे थे। लोगों ने गांव का नाम कासन बताया तो उन्होंने इसे काशी समझ लिया। यहां काशी समझ कर तपस्या की। इस दौरान गांव के बाबा बिसन सिंह ने उनकी बहुत सेवा की थी।
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शिवभक्ति में लीन रहा शहर
पटौदी। सावन के अंतिम सोमवार पर शहर के लोग शिवभक्ति में लीन रहे। पटौदी क्षेत्र के शिवालयों एवं मंदिरों में हर-हर महादेव जयघोष के साथ ही श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। सावन के अंतिम सोमवार को प्राचीन शिव मंदिर इंछापुरी में श्रद्धालुओं की ओर से प्रात सुबह बजे से ही शिवलिंग पर जलाभिषेक करना शुरू हो गया। वहीं, शिवभक्तों ने शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, धतूरा, फल, फूल चढ़ाकर पूजा अर्चना की। वहीं, इस मौके पर प्राचीन शिव मन्दिर इंछापुरी परिसर में कई शिवभक्तों द्वारा भंडारे का भी आयोजन किया गया। संवाद
भगवान शिव की आराधना से होता है राष्ट्र का कल्याण
गुरुग्राम। श्रावण मास भगवान शिव का विशेष मास है। यह न केवल आध्यात्मिक साधना का समय है, अपितु आत्मबल, संयम, सेवा और राष्ट्रहित के संकल्प का भी काल है। जब समस्त ब्रह्मांड ओउम् नम: शिवाय के पवित्र स्वर में गुंजायमान होता है, तब शिव की आराधना हमें सिखाती है कि व्यक्तिगत कल्याण तभी सार्थक है जब वह सामाजिक और राष्ट्रीय कल्याण से जुड़ा हो। उक्त विचार विश्व ब्राह्मण संघ के चेयरमैन शशिकांत शर्मा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिव, जिन्हें देवों के देव महादेव कहा जाता है, ने समुद्र मंथन से निकले कालकूट विष को पीकर यह संदेश दिया कि जो भी सच्चा नेता, समाज का पथप्रदर्शक या राष्ट्र का सेवक है, उसे कठिनाइयों को स्वयं झेलकर दूसरों को अमृत प्रदान करना चाहिए। संवाद