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Gurugram News: 65 फुट ऊंचे पुतले के दहन ने आकर्षित किया जनसैलाब

Thu, 02 Oct 2025 11:23 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
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सत्ती सरोवर पर धूं धूं कर जलते रावण के पुतला
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रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के विशाल पुतलों को जलाकर धर्म की विजय का दिया संदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल/होडल। बुराई पर अच्छाई की जीत और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक पर्व विजयदशमी (दशहरा) गुरुवार को जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पलवल और होडल में आयोजित भव्य कार्यक्रमों ने हजारों की भीड़ को आकर्षित किया। दोनों ही स्थानों पर रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के विशाल पुतलों का दहन कर धर्म की विजय का संदेश दिया गया।

पलवल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस खेल परिसर के मैदान में श्रीसनातन धर्म दशहरा कमेटी के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के तहत राम-रावण युद्ध का मंचन किया गया। राम और लक्ष्मण के बाण छोड़ते ही 60 फुट ऊंचे रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले जल उठे। इस अवसर पर राम, लक्ष्मण, हनुमान और सुग्रीव की भूमिकाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शोभायात्रा जेठानंद धर्मशाला से शुरू होकर शहर के प्रमुख बाजारों से होती हुई खेल परिसर तक पहुंची। बुलंदशहर से आई रामलला की विशेष झांकी, भगवान शंकर, खाटू श्याम, राधा-कृष्ण और शिव-पार्वती की झांकियां मुख्य आकर्षण रही। विधायक गौरव गौतम ने रावण दहन किया और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देते हुए लोगों को विजयदशमी की बधाई दी।
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दूसरी ओर, होडल में भी दशहरा पर्व की धूम देखने को मिली। प्राचीन सत्ती सरोवर पर 65 फुट ऊंचे रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया गया। इससे पूर्व बस स्टैंड स्थित चिराग पैलेस से निकली शोभायात्रा ने शहरभर का भ्रमण किया। शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता माता सहित अनेक धार्मिक झांकियों को लोगों ने फूलों से स्वागत किया। झांकियों को सजाने के लिए विशेष तौर पर मथुरा-वृंदावन और गोवर्धन से कलाकार बुलाए गए थे।
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कार्यक्रम में पूर्व मंत्री चौधरी हर्षकुमार, विधायक हरेंद्र रामरतन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री हर्षकुमार ने कहा कि दशहरा केवल उत्सव नहीं, बल्कि धर्म और सत्य की विजय का प्रतीक है। वहीं, रामलीला मंचन का संचालन घनश्याम वशिष्ठ उर्फ कान्हा भैया द्वारा किया गया। दोनों ही स्थानों पर मेलों में लोगों ने पकौड़ी, गोलगप्पे और खिलौनों का आनंद लिया। महिलाएं चाट-पकौड़ी की दुकानों पर उमड़ीं तो बच्चे गुब्बारे और खिलौनों की खरीदारी करते नजर आए। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। विजयदशमी के पर्व ने न केवल श्रद्धालुओं को भक्ति और आस्था के सूत्र में बांधा, बल्कि सामाजिक सहभागिता और संस्कृति की जीवंत झलक भी प्रस्तुत की। रावण दहन के साथ ही लोगों ने बुराई का त्याग कर अच्छाई को अपनाने का संकल्प लिया।

सत्ती सरोवर पर धूं धूं कर जलते रावण के पुतला

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