सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट की तरफ से एक दिवसीय प्रशिक्षण हुआ आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (सीएंडडी) वेस्ट और धूल प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। हाल ही में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की ओर से नगर निगम गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निर्माण कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन अनिवार्य है।
दिल्ली-एनसीआर में पीएम10 प्रदूषण का 42 प्रतिशत हिस्सा सड़क, मिट्टी और निर्माण गतिविधियों से आता है। निर्माण क्षेत्र वैश्विक संसाधनों का 40-50 प्रतिशत उपभोग करता है, जबकि इसके कचरे का 80-90 प्रतिशत हिस्सा पुनर्चक्रण योग्य होता है। विंड बैरियर और सामग्री के सही रखरखाव जैसे उपायों से धूल उत्सर्जन में 64 से 79 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है।अनुचित निस्तारण से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि यह शहरी बाढ़ और जलाशयों के अवरुद्ध होने का कारण भी बनता है। अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका ने प्रतिबद्धता जताई है कि गुरुग्राम निगम इन सुझावों को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा।