अरावली से जुड़े संगठनों ने भौगोलिक, भूगर्भ शास्त्र और स्थानीय अध्ययन के बाद तैयार की रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अरावली के संरक्षण पर काम कर रहे संगठनों के प्रतिनिधियों ने अध्ययन आधारित एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें अरावली को सुरक्षित बनाने के सुझाव दिए गए हैं। अरावली बचाओ नागरिक मूवमेंट संगठन समेत राजस्थान के संगठनों ने हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में अरावली रेंज का दौरा करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों से बातचीत कर यह अध्ययन रिपोर्ट तैयार की है। इसमें अरावली में खनन को रोकने, अरावली के इको सिस्टम को संरक्षित रखने के लिए कई स्तरों की सुरक्षा व्यवस्था की सलाह दी है।
इस अध्ययन में बताया गया है कि अरावली की परिभाषा के बजाय अरावली के भूमि उपयोग की परिभाषा तय किए जाने की जरूरत है। इसके लिए कई स्तरीय प्रबंधन योजना बनाने की जरूरत है जो इलाके भूगर्भशास्त्रीय, पारिस्थितिकी और सामाजिक जरूरत के हिसाब से हो। पिछले दिनों अरावली की ऊंचाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 100 मीटर की सीमा और इसके बाद इस फैसले पर स्टे के बाद संगठनों के प्रतिनिधियों ने अरावली पर भ्रमण और अध्ययन के बाद यह रिपोर्ट जारी किया है। इसमें भूगोल, भूगर्भ शास्त्र के शोध और जर्नल का भी सहारा लिया गया है।
अरावली ए लेयर्ड इनक्वायरी शीर्षक अध्ययन के सुझाव
- अरावली में भूमि उपयोग की परिभाषा की जरूरत है, अरावली की परिभाषा की नहीं
- ओजीपी (ओपन गवर्नमेंट पार्टनरशिप) की पहचान करके अरावली की माइनिंग की मैपिंग की जाएं
- माइनिंग और रॉक कटिंग (बड़े और छोटे खनिज ) के बीच अंतर किया जाए
- भू खनन विभाग के जरिए सस्टेनेबल माइनिंग के लिए मैनेजमेंट प्लान लागू किया जाए
- अरावली की मुख्य जिम्मेदारी मिनिस्ट्री ऑफ माइंस और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को दिया
- माइनिंग और एआई के इस्तेमाल में पर्यावरण के लिए जिम्मेदार विश्व की बेहतर प्रक्रिया को अपनाया जाए
- अरावली इकोसिस्टम को बचाने के लिए कई स्तरीय योजना बनाई जाए
- संरक्षित क्षेत्र की गलतफहमी को ठीक किया जाए
- अरावली के साथ शहरीकरण और रियल एस्टेट के मुद्दों को साफ तौर पर सुलझाया जाए
- फैसले लेने में सामूहिक भागीदारी का एक असरदार सिस्टम तैयार किया जाए