फिरोजपुर झिरका। गत दिन पहले जीप द्वारा एक ही गांव के छह लोगों की कुचलने से हुई मौत के बाद भी नूंह का प्रशासन गहरी नींद से नहीं जागा है। यातायात पुलिस की लापरवाही और प्रशासन का लचर रवैया के कारण कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। शहर में दिन के उजाले में जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे बच्चे अधिकारियों की नजरों से दूर तो नहीं हैं, लेकिन उनकी लापरवाही इन बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है। गांवों के सैकड़ों बच्चे रोज सुबह स्कूल में जाने व आने के लिए डग्गामार वाहनों का उपयोग करते हैं। बच्चे रोज अंबेडकर चौक से डग्गामार वाहनों की छतों पर बैठकर सफर करने को मजबूर हैं, लेकिन इस बात से प्रशासन अंजान बना हुआ है। रोजाना का बच्चों द्वारा किया जा रहा यह सफर यातायात पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ।
लोगों का कहना है कि शिव मंदिर के पास शिव भक्तों का चालान काटने के लिए यह ट्रैफिक पुलिस वाले सुबह से शाम तक खड़े रहते हैं लेकिन अंबेडकर चौक पर खुलेआम डग्गामार वाहनों की छत पर सवारी करते हुए यह स्कूली बच्चे नहीं दिखाई देते और ना ही यह वाहन दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि यह हालात तब हैं जब अंबेडकर चौक पर पुलिस का एक नाका भी लगा हुआ है। उनका कहना है कि इतनी भीषण गर्मी पड़ रही है, अगर ऐसे में कोई बच्चा बीमार होकर गिर जाए तो उसकी जान पर आ सकती है। गत दिनों उपमंडल अधिकारी ना0 ने स्कूली वाहनों को लेकर वाहनों का निरीक्षण भी किया था, लेकिन ज्यादातर निजी स्कूल संचालकों द्वारा अपने नए वाहनों को ही निरीक्षण के लिए भेजा गया।
पुलिस द्वारा लगातार डग्गामार वाहनों का चालान काटा जा रहा है। अगर स्कूल के छात्र-छात्राओं को वाहनों की छत पर बिठाया जा रहा है तो ऐसे वाहनों को इंपाउंड करने का कार्य पुलिस द्वारा किया जाएगा। - पवन कुमार, जिला यातायात प्रबंधक, नूंह।