- ग्रामीणों में सरकार के प्रति असंतोष, बिजली व पानी की समस्या, सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई
राजीव पाराशर
हसनपुर। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और पंचायत के सीमित बजट के कारण सहनौली गांव बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। गांव के कई विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं, जिससे गांव के लोगों में सरकार के प्रति असंतोष है। गांव में पांच हजार की आबादी के हिसाब से चार सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है, लेकिन गांव में केवल एक ही कर्मचारी नियुक्त है। इससे गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। गांव में फैली गंदगी से ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, गांव में बिजली और पानी की भी बड़ी समस्या है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में सिर्फ 15 घंटे बिजली मिलती है। वहीं, कई बार बड़े फॉल्ट की स्थिति में गांव में कई-कई दिन तक अंधेरी छाया रहता है। वहीं, गांव में पानी की गंभीर समस्या है।
चार एकड़ जमीन के बावजूद विकास कार्य अधूरे
गांव पंचायत ने कूड़ा निस्तारण केंद्र, सामुदायिक भवन, पुस्तकालय, गांव की फिरनी के कच्चे रास्ते और श्मशान घाट में टीन शेड लगवाने के लिए चार एकड़ जमीन सरकार को सौंपी थी। लेकिन अब तक इनमें से कोई भी कार्य पूरा नहीं हुआ है। वहीं, सरकार द्वारा घोषित अमृत सरोवर योजना के तहत गांव की जोहड़ों के जीर्णोद्धार के लिए अनुदान राशि देने की बात कही गई थी। लेकिन यह योजना भी ठंडे बस्ते में है। दो एकड़ में फैला जोहड़ गंदगी से भरा पड़ा है। सफाई कर्मचारी और ग्रामीण मजबूरी में इस जोहड़ को कूड़ा डालने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग जल्द किया जाए योजनाओं पर काम
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को जल्द से जल्द इन समस्याओं का समाधान करना चाहिए। पंचायत को अधिक बजट और संसाधन मुहैया कराए जाएं, ताकि सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जा सके। बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएं। सहनोली गांव की स्थिति राज्य सरकार और पंचायत की उदासीनता का स्पष्ट उदाहरण है। सरकारी घोषणाएं और योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीणों का यह आक्रोश बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
गांव में सिर्फ एक सफाई कर्मचारी नियुक्त है, जबकि चार की जरूरत है।- सोमदत्त, स्थानीय निवासी
24 घंटे में केवल 15 घंटे बिजली मिलती है और फाल्ट की स्थिति में कई दिन तक अंधेरा रहता है।- त्रिलोक चंद, स्थानीय निवासी
चार एकड़ जमीन देने के बावजूद कूड़ा निस्तारण केंद्र, सामुदायिक भवन और अन्य विकास कार्य अधर में हैं।- कन्हैया, स्थानीय निवासी
जोहड़ों का जीर्णोद्धार और बीपीएल प्लॉटों में बिजली-पानी की व्यवस्था अब तक पूरी नहीं हुई है।- पन्नालाल, स्थानीय निवासी
गांव के विकास कार्यों की लिस्ट बनाकर जिले के अधिकारियों को भेजी हुए है मंजूरी आते ही सभी पर काम शुरू हो जाएगा।- राहुल, पंचायत अधिकारी