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लापरवाही से वाहन चलाने का प्रमाण नहीं सड़क हादसा : कोर्ट

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कहा-दुर्घटना के अन्य कारकों पर भी विचार करना चाहिए, गाड़ी से टक्कर मारने के आरोपी को किया बरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सड़क दुर्घटनाओं में लापरवाही तय करने को लेकर कोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किया है। गुरुग्राम जिला अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि महज एक सड़क हादसा हो जाना इस बात का अकाट्य प्रमाण नहीं है कि वाहन चालक तेज रफ्तार या लापरवाही से ही गाड़ी चला रहा था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विशाल की अदालत ने इस टिप्पणी के साथ सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के मामले में नामजद आरोपी कार चालक धीरज कुमार को बरी करने का आदेश सुनाया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा।
इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से कई दलीलें पेश की गईं। मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब डॉक्टर ने अपनी गवाही में कोर्ट के सामने यह माना कि मृतक को लगी चोटें किसी सख्त सतह पर ऊंचाई से गिरने के कारण भी लग सकती हैं। इस मेडिकल विरोधाभास ने गहरा संदेह पैदा कर दिया, जिसका लाभ आरोपी को मिला। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी चालक के कारण ही व्यक्ति की मौत हुई है। अदालत ने यह भी माना कि दुर्घटना के कारणों का निर्धारण करते समय अन्य संभावित कारकों पर भी विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कार चालक धीरज को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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यह था मामला
सड़क हादसे के मामले में मृतक महेंद्र के बेटे की शिकायत पर सेक्टर-17-18 थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया था। चार अगस्त 2025 की रात को महेंद्र कुमार अपनी गार्ड की ड्यूटी पूरी करने के बाद साइकिल से दिल्ली के कापसहेड़ा स्थित अपने घर लौट रहे थे। अतुल कटारिया चौक के पास पीछे से आ रहे कार उनकी साइकिल से टकरा गई। हादसे में महेंद्र कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की मदद से आरोपी कार चालक धीरज कुमार को गिरफ्तार किया। इसके बाद उसके खिलाफ चालान अदालत में पेश किया।
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