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Gurugram News: चिनटेल्स पैराडाइसो के पांच टावर कंट्रोल ब्लास्ट से ध्वस्त करने की तैयारी

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कंट्रोल ब्लास्ट से कमजाेर टावर को ध्वस्त करने की खबर उजाला ने एक साल पहले ही की थी प्रकाशित
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नोएडा के चर्चित ट्विन टावर को ध्वस्त करने वाली एडिफिस कंपनी को सौंपी जा सकती है जिम्मेदारी
चिनटेल्स के एक टावर का सर्वे करने शुक्रवार को मौके पर पहुंचेगी एडिफिस के विशेषज्ञों की टीम

संजय शिशौदिया
गुरुग्राम। आईआईटी दिल्ली की संरचनात्मक जांच में रहने योग्य नहीं पाए गए चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के पांच टावर कंट्रोल ब्लास्ट के माध्यम से ध्वस्त किए जा सकते हैं। इस काम के लिए बिल्डर प्रबंधन ने मुंबई की एडिफिस नामक कंपनी से संपर्क किया है। एडिफिस वहीं कंपनी है जोकि कंट्रोल ब्लास्ट के माध्यम से बंगलूरू की एक इमारत और नोएडा में ट्विन टावर को ध्वस्त कर चुकी है। अमर उजाला ने एक साल पहले 8 नवंबर को ही अपनी खबर के माध्यम से बताया था कि चिनटेल्स के टावर को भी कंट्रोल ब्लास्ट के माध्यम से ध्वस्त किया जा सकता है। अब शुक्रवार को इस कंपनी के विशेषज्ञों की टीम मौके पर टावर का निरीक्षण करने पहुंचेगी।

जिला उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने भी स्पष्ट किया था कि चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के डी-टॉवर को नोएडा के ट्विन टॉवर की तर्ज पर ही ध्वस्त किया जाएगा। इसके बाद मुंबई की एडिफिस कंपनी के प्रतिनिधि उत्कर्ष मेहता ने फोन पर गुरुग्राम के प्रशासनिक अधिकारियों से बात की थी। अब इस टीम को सर्वे के लिए बिल्डर प्रबंधन की ओर से ही आमंत्रित किया गया है। शुक्रवार को टीम द्वारा सर्वे का काम शुरू किया जाएगा। इसके बाद टीम अपनी रिपोर्ट बिल्डर को सौंपेगी। बिल्डर प्रबंधन की ओर से जेएन यादव ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि शुक्रवार को एडिफिस की टीम सर्वे करेगी। इसमें कंट्रोल ब्लास्ट के साथ ही मैनपावर के माध्यम से टावर को ध्वस्त करने की संभावनाएं देखी जाएंगी। जो भी प्रक्रिया सुरक्षित होगी, उसी को अपनाया जाएगा।
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एक टावर को ध्वस्त करने में लग सकता है 2000 किलो विस्फोटक
चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के कुल पांच टावर रहने के लिए अयोग्य घोषित किए जा चुके हैं। ज्यादातर टावर को लोगों द्वारा खाली भी किया जा चुका है। कंट्रोल ब्लास्ट की तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों की माने तो चिनटेल्स के एक टावर को ध्वस्त करने में करीब 1800 से 2000 किलो तक विस्फोटक का प्रयोग किया जाएगा। ऐसे में अगर पांचों टावर को इसी तकनीक से ध्वस्त किया गया तो इसमें 10 हजार किलो तक विस्फोटक का प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि सर्वे के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अपनाई जाएंगी टि्वन टावर ध्वस्तीरण की प्रक्रिया:
एडिफिस कंपनी के एक विशेषज्ञ के अनुसार अगर उनकी कंपनी को इस टॉवर को गिराने का काम सौंपा जाता है, तो इसमें उन्हीं सब प्रक्रियाओं का प्रयोग किया जाएगा, जोकि नोएडा के ट्विन टॉवर ध्वस्तीकरण में प्रयोग की गई थीं। इसमें आसपास की सोसाइटियों का बीमा भी कराया जाएगा।
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यह है मामला

बीते साल 10 फरवरी को गुरुग्राम के सेक्टर-109 स्थित चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के टॉवर डी की छठीं मंजिल की छत का एक हिस्सा गिर गया था। इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे। हादसे के करीब 9 महीने बाद गुरुग्राम के उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने एक प्रेसवार्ता में कहा था कि आईआईटी दिल्ली के एक्सपर्ट्स की संरचनात्मक जांच में यह टॉवर रहने योग्य नहीं पाया गया है। ऐसे में इसे ध्वस्त किया जाएगा।
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