गुरुग्राम। पुलिस ने नगर निगम के अधिकारियों से ढाई करोड़ के भ्रष्टाचार से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों तथा ठेकेदारों की फाइलें मांगीं है, लेकिन निगम के अधिकारियों का प्रयास होगा कि भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों के सबूत वाली फाइलें न पहुंचे, इसीलिए अफसरों और कुछ कर्मचारियों की गोपनीय बैठकें होती रहीं कि किस तरह से इस शिकंजे से अपने को बचाया जा सके, इसीलिए वह फाइलों से उन महत्वपूर्ण दस्तावेज को निकालने के प्रयास में हैं, जिनकी वजह से वह सीधे फंस रहे हैं।
22 जुलाई को प्रदेश के गृह एवं शहरी विकास मंत्री अनिल विज ने औचक निरीक्षण किया था, जिसमें पार्षदों के फर्जी कार्य संतुष्टि पत्र लगाकर करीब ढाई करोड़ रुपये की नगर निगम को चपत लगाने की कोशिश का खुलासा हुआ था। उसी के अगले दिन 23 जुलाई को चार अधिकारियों और तीन ठेकेदारों के काम के बारे में सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
इसी के बाद पुलिस कार्यकारी अभियंता पंकज सैनी, गोपाल कलावत, एसडीओ विक्की कुमार, जेई विनोद कुमार और नगर निगम के ठेकेदार दिलावर सिंह, राजकुमार और ठेकेदार पवन बल्हारा के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में लग गई है। सदर थाना पुलिस का कहना है कि निगम से इनके काम की विस्तृत जानकारी मांगी है। इस जानकारी के मिलने के बाद ही इनके द्वारा किए गए हेरफेर का ठीक से खुलासा हो सकेगा। विगत समय में इनके द्वारा कराए गए काम की फाइलों को भी निगम को पत्र लिखकर मांगा जाएगा। फाइलों से इनकी लापरवाही साफ हो जाएगी।
फर्जी पत्र तैयार करने वालों की भी तलाश
पुलिस उन पत्रों को भी अपने कब्जे में लेगी, जिनके आधार पर ढाई करोड़ के भुगतान के लिए फाइल तैयार की गई थीं। इन पत्रों में एक ही जैसी लिखावट है या फिर अलग-अलग, इन सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया जाएगा। साथ में फर्जी पत्र तैयार करने वालों की भी तलाश की जा रही है। इस में एफआईआर के अलावा और कौन-कौन शामिल हैं, उनकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। शुक्रवार को पुलिस को दी शिकायत में नगर निगम के मुख्य अभियंता ठाकुर लाल ने कहा था कि आरोपियों ने बिना कार्य किए ही नगर निगम के अलग-अलग वार्डों के पार्षदों के फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर करीब ढाई करोड़ रुपये के बिलों की अदायगी के लिए सिफारिश की थी, जबकि इनमें से कोई भी कार्य मौके पर नहीं हुआ है।