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सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट याचिका स्वीकार, आठ नवंबर को होगी सुनवाई

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गुरुग्राम। प्रिंस हत्याकांड में एसीपी सहित चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति न देने के खिलाफ दायर की गई याचिका को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सागवान ने आठ नवंबर को इस प्रकरण की सुनवाई के आदेश किए हैं। इससे पहले सीबीआई और हरियाणा सरकार को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं।
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पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट में राज्य सरकार ने हलफनामा दाखिल करके कहा था कि प्रिंस हत्याकांड में एसीपी सहित चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई औचित्य नहीं बनता है। इसलिए इस प्रकरण को यहीं रोक दिया जाए। जबकि इस मामले की जांच में सीबीआई ने एसीपी नरेंद्र खटाना, भौंडसी के एसएचओ विरेंद्र सिंह, एसआई सुभाष चंद्र और एएसआई शमशेर सिंह को दोषी माना था। इसी के साथ उन सभी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने सरकार से अनुमति प्रदान करने को कहा तो सरकार ने इनकार कर दिया। साथ में यह लिखकर दिया कि इस प्रकरण में पुलिस के खिलाफ केस नहीं बनता है।
सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्रिंस के पिता की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस याचिका को हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सागवान ने स्वीकार कर लिया है। साथ में आठ नवंबर को सुनवाई की तारीख तय कर दी। इससे पहले सीबीआई और सरकार को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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आरोपी भोलू की जमानत याचिका पर 27 को होगी सुनवाई
प्रिंस के हत्याआरोपी भोलू की जमानत जिला एवं सत्र न्यायालय से खारिज हो गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका लगी हुई है, इस मामले में अदालत ने 27 जुलाई तय की है। उसी दिन दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही अदालत की ओर से जमानत के बारे में फैसला होगा।
भोलू को बालिग मानकर कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट में
घटना वाले दिन आरोपी भोलू नाबालिग था लेकिन अब बालिग है, इसलिए पीड़ित पक्ष की ओर से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले में आठ जुलाई तय हुई थी लेकिन किन्हीं कारणों से यह सुनवाई टाल दी गई है, जिसके बारे में अगले सप्ताह नई तारीख तय होने की संभावना है।
चार साल पहले हुई थी प्रिंस की हत्या
एक निजी स्कूल के छात्र प्रिंस की 8 सितंबर 2017 को धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने अशोक नामक बस कंडक्टर को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था। पुलिस की यह कार्रवाई प्रिंस के परिजनों के गले नहीं उतर रही थी। इसलिए प्रिंस के पिता तथा अशोक के परिजनों ने इस मामले की सीबीआई से जांच कराने का अनुरोध राज्य और केंद्र सरकार से किया। बाद में सरकार के आदेश पर सीबीआई जांच हुई जिसमें अशोक को निर्दोष मानते हुए रिहा कर दिया गया था। इस मामले में सीबीआई ने उसी स्कूल के एक छात्र भोलू को दोषी मानते हुए गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस की भूमिका संदिग्ध होने के कारण पिछले साल एसीपी सहित चार के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई थी।
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