झूठी घोषणा करने वालों पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। जिला निर्वाचन अधिकारी उत्तम सिंह ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने अथवा नाम हटाने के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले फॉर्म-7 आवेदनों की संख्या निर्धारित की गई है। आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, किसी व्यक्ति द्वारा बिना ठोस आधार के आपत्तियां दर्ज कराने की प्रवृत्ति को रोकने व मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
दावे एवं आपत्तियों की अवधि में अधिकतम 10 आवेदन
आयोग के निर्देशानुसार, दावे एवं आपत्तियों की अवधि के दौरान एक मतदाता अधिकतम 10, फॉर्म-7 आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। वहीं, मतदाता सूचियों के निरंतर अद्यतन की अवधि के दौरान एक मतदाता द्वारा प्रति माह अधिकतम 5 फार्म-7 आवेदन प्रस्तुत किए जा सकेंगे। ये सीमाएं ऑनलाइन एवं ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदनों पर लागू होंगी।
फॉर्म-7 आवेदन के लिए पात्रता और अनिवार्यताएं
निर्देशों में कहा गया है कि पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960 के नियम 13 (2) के अनुसार फॉर्म-7 आवेदन केवल वही व्यक्ति प्रस्तुत कर सकता है, जिसका नाम संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हो। आवेदन में सभी आवश्यक विवरण भरना तथा आपत्तिकर्ता द्वारा निर्धारित स्थान पर स्वयं हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। हस्ताक्षर की मुहर को मूल हस्ताक्षर का विकल्प नहीं माना जाएगा।
आवेदनों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया
आयोग द्वारा निर्वाचक पंजीयन अधिकारियों (ईआरओ) को निर्देश दिए गए हैं कि वे फॉर्म-7 आवेदनों की जांच करते समय आवेदक की वास्तविकता एवं मतदाता सूची में उपलब्ध विवरणों का सत्यापन सुनिश्चित करें। यदि किसी व्यक्ति द्वारा पांच से अधिक मामलों में आपत्ति दर्ज कराई जाती है, तो संबंधित प्रावधानों के अनुसार व्यक्तिगत रूप से सत्यापन किया जाना चाहिए।