गुुरुग्राम। युद्धग्रस्त यूक्रेन से गुरुग्राम के छात्रों को निकालने को लेकर जिला प्रशासन भले ही तमाम दावे कर रहा हो लेकिन सुमी ऐसा क्षेत्र है जहां पर फंसे छात्रों को निकालने के लिए सरकार की तरफ से अब तक कोई कवायद नहीं की जा रही है। युद्ध शुरू हुए 10 दिन हो चुके हैं। ऐसे में परेशान छात्रों को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें और जान बचाने के लिए आखिर किस रास्ते से निकलें।
जिला प्रशासन बाकायदा रिपोर्ट जारी कर यूक्रेन में फंसे कुल 91 में से 76 छात्रों की सकुशल स्वदेश वापसी की बात कह रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि जिला प्रशासन के पास सुमी में फंसे छात्रों की कोई जानकारी ही नहीं है और छात्र अपनी किस्मत पर निर्भर हैं।
76 छात्रों की सकुशल घर वापसी
जिला प्रशासन की तरफ से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में फंसे 76 विद्यार्थी शनिवार शाम तक स्वदेश लौट चुके हैं। जिला उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बताया कि यूक्रेन से सभी की सकुशल वापसी होने तक प्रशासन हर प्रयास जारी रखेगा। विद्यार्थियों की हर परिस्थिति पर नजर रखी जा रही है। विद्यार्थियों का हाल उनके अभिभावकों से पता किया जा रहा है। जिला उपायुक्त ने कहा कि केंद्र सरकार ने यूक्रेन में फंसे लोगों को स्वदेश लाने और हरियाणा सरकार ने उनको गुरुग्राम तक लाने की व्यवस्था की है। सभी लोगों को एयरपोर्ट से घर तक लाने का इंतजाम किया गया है।
खाने-पीने का सामान खत्म
दूसरी तरफ सुमी में फंसे पटौदी के छात्र अंकित धनखड़ ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उन्हें निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। अपने राज्य के छात्रों को निकालने के लिए मुख्यमंत्री तक कुछ नहीं कर रहे हैं। खाने-पीने की सामग्री भी खत्म हो गई है और सभी छात्र-छात्राएं परेशान हैं। हालात यह हैं कि बर्फ को पिघलाकर पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है। टैंकर आता हैै तो पानी के लिए दो घंटे तक खड़ा होना पड़ रहा है। सीजफायर कर छात्रों को निकालने को लेकर रूस के दावों के बारे में पूछा तो अंकित ने कहा कि पता नहीं कहां के छात्रों को निकाला जा रहा है, हमें तो निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहा है।
फंसे हैं 700 से ज्यादा छात्र
छात्रों ने बताया कि सुमी स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में ही इस समय करीब 700 से ज्यादा छात्र फंसे हैं जिनको कब निकाला जाएगा कोई नहीं जानता। अंकित के पिता चरण सिंह धनखड़ ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि सुमी में फंसे छात्रों को निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहा है।