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इलाज में लापरवाही, मरीज ने तोड़ा दम

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गुरुग्राम। कोरोना वायरस का प्रकोप तेजी के साथ बढ़ता जा रहा है, जिसकी चपेट में आकर लोग अपनी जिंदगी गंवा रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी नागरिक अस्पताल में एक व्यक्ति ने इलाज में लापरवाही के कारण दम तोड़ दिया। शव के कोरोना संक्रमित होने की आशंका होने पर निजी वाहन से ले गए, जबकि अस्पताल कर्मी खुद ही उसके शव को गाड़ी में रखते दिखाई दिए।
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कोरोना वायरस के कारण सरकार ने अंतिम संस्कार के लिए गाइडलाइन जारी की हैं। इसके बाद भी अस्पताल की ओर से लापरवाही बरती जा रही है, जिसकी बानगी बृहस्पतिवार को सरकारी अस्पताल में देखने को मिली, जहां पर दिल्ली के रहने वाले एक व्यक्ति अपने रिश्तेदार को गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल में लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने स्ट्रेचर पर ही उसका इलाज शुरू कर दिया और कुछ देर बाद उसकी मौत हो गयी, जबकि मृत युवक के कोरोना संक्रमित होने का अंदेशा था। इसके बाद भी अस्पताल कर्मियों ने शव आनन-फानन में परिजनों को निजी वाहनों में डालकर दिया और लेकर चल गए, जबकि कोरोना संक्रमितों के शव को सीधे श्मशान घाट भेजने का प्रावधान सरकार की ओर किया गया है। इसके बाद अस्पताल प्रबंधक की ओर शव को परिजनों के सुुपुर्द कर दिया गया। इस बारे में डिप्टी सिविल सर्जन मनीष राठी का कहना है कि यह प्रकरण संज्ञान में नहीं है, जानकारी कर ही कुछ बता सकेंगे।
पापा की हालत खराब है, डॉक्टर साहब भर्ती कर लो
गुरुग्राम। पापा की हालत खराब है, डॉक्टर साहब भर्ती कर लो। उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही है। ये बात पटौदी के रहने वाले अरुण ने नागरिक अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ से कही, लेकिन डॉक्टर ने मरीज को देखा तक नहीं, अरुण कई घंटे तक इंतजार करने के बाद पिता राम किशन को ऑटो में बैठाकर वापस ले गया। ऐसा ही रोजाना का हाल नागरिक अस्पताल में देखने को मिल रहा है। जब तीमारदार अपने बीमार परिजनों को लेकर पहुंचते हैं और मरीज को कोई अस्पताल कर्मी देखने तक नहीं पहुंचता।
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अधिकांश तीमारदार खुद ही बेसुध मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाकर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लेकर जाते हैं। जहां पर डॉक्टर उनको बेड न होने का हवाला देकर वापस भेज देते हैं। इतना ही नहीं, जमीन, स्ट्रेचर और पत्थर की स्लैब पर लिटाकर इलाज की खानापूर्ति के लिए ऑक्सीजन लगाकर चले जाते हैं। बेबस परिजन अपनों की जिंदगी बचाने के लिए डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाते नजर आते हैं। पिछले कई सप्ताह से कई मरीजों को उपचार के लिए निजी एंबुलेंस के सहारे बाहर भी भेजा जा रहा है। बेबस परिजन अपने की सांस बचाने के लिए अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हो गए हैं।
अस्पताल कर्मी नदारद, खुद ही मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर पहुंचे
गुरुग्राम। नागरिक अस्पताल में अपनों की जिंदगी बचाने के लिए लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन इमरजेंसी के बाहर मरीजों को भर्ती करने के लिए अस्पताल कर्मी नदारद रहते हैं। बेबस परिजन खुद ही स्ट्रेचर लेकर मरीज को इमरजेंसी में दाखिल कराने पहुंच रहे हैं। बृहस्पतिवार को राजीव नगर निवासी राजू अपने रिश्तेदार को लेकर अस्पताल में पहुंचा। काफी समय से अस्पताल कर्मियों से मरीज को एंबुलेंस से उतारने की गुहार लगाता रहा, लेकिन जब काफी समय तक कोई नहीं आया, इसके बाद खुद ही एंबुलेंस से अपने रिश्तेदार को बमुश्किल स्ट्रेचर के सहारे इमरजेंसी में लेकर गया, जहां पर तैनात चिकित्सकों ने उसके रिश्तेदार को बेसुध हालत में स्ट्रेचर पर ही छोड़ दिया। बार-बार विनती करने पर चिकित्सकों का दिल नहीं पसीजा और उन्होंने ऑक्सीजन लगाकर उसको स्ट्रेचर पर ही लिटा दिया, जिससे मरीज ने राहत की सांस ली। यहीं नहीं अस्पताल में शव लेकर जाने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं हो रही हैं, इसलिए लोग निजी वाहनों और ऑटो में ले जा रहे हैं। संवाद
कतार में टूट रहे सामाजिक दूरी के नियम
गुरुग्राम। कोविड की जांच के लिए रजिस्ट्रेशन कराने को लोगों को लाइन में पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ा रहा है। कतार में लगने वाले लोगों के बीच सामाजिक दूरी के नियम टूट रहे हैं। लोग एक-दूसरे पर सटे नजर आते हैं, जिसके कारण कोरोना वायरस फैलने का खतरा मंडराने लगा है। नागरिक अस्पताल में कोरोना जांच के लिए रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई है, जिस पर सुबह से लोगों की भीड़ जुटने शुरू हो जाती है। लोग भी कतार लगाकर रजिस्ट्रेशन कराने में लग जाते हैं, लेकिन पांच घंटे के लंबे इंतजार के बाद ही उनकी बारी आ पाती है। लोग एक-दूसरे पर चढ़े रहते हैं, जिससे लोगों के बीच कोरोना संक्रमण के प्रसार के आशंका बढ़ जाती है। वहीं, अस्पताल की ओर इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता। संवाद
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