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रेमिडेसिवर इंजेक्शन की व्यवस्था कराने में प्रशासन फेल

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गुरुग्राम। कोरोना संक्रमण के कारण गुरुग्राम की स्वास्थ्य सेवाएं बद से बदतर हो गईं हैं। बेड, एंबुलेंस, ऑक्सीजन और रेमिडेसिवर इंजेक्शन तक नहीं मिल रहे हैं। जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हैं। यहां की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के हालात अस्पतालों में तड़प रहे मरीजों के तीमारदार बयां कर रहे हैं। उन्हें रेमिडेसिवर इंजेक्शन चाहिए लेकिन नहीं मिल रहे, जबकि वीवीआईपी मरीजों के इलाज में प्रशासन जुटा हुआ है।
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कल्याणी अस्पताल को ही ले लीजिए। यहां के सेक्टर पांच निवासी सुभाष अरोरा को भर्ती कराने से लेकर ऑक्सीजन तथा रेमिडेसिवर इंजेेक्शन की व्यवस्था कराने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता सूरज नागरथ ने डीसी को फोन किया। लेकिन फोन उठा नहीं, उसके बाद डीसी से लेकर सीएम तक ईमेल भेजा। लेकिन संक्रमित मरीज को भर्ती कराना तो दूर जवाब तक नहीं दिया। दो दिन पहले व्यक्तिगत रूप से काफी प्रयास करने पर कल्याणी अस्पताल में भर्ती कराया जा सका।
आईसीयू बेड न होने के कारण इस समय मरीज ऑक्सीजन पर है। डाक्टर ने रेमिडेसिवर इंजेक्शन के लिए कहा है। जिसकी प्रशासन के निर्देश पर औपचारिकताएं भी पूरी की जा चुकी हैं लेकिन नहीं मिल रहा। जिसके लिए जिला ड्रग कंट्रोल अधिकारी अमनदीप चौहान को फोन भी किए लेकिन उनका फोन उठता ही नहीं है। जबकि खुले बाजार में 25 हजार रुपये लेकर इंजेक्शन देने की बात कही जा रही है।
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इसी तरह के हालात पुष्पांजलि, पारस, आर्वी, आर्यन, वरदान आदि अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों के सामने हैं। उनकी सुनी नहीं जा रही है, जबकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह मरीज के लिए इंजेक्शन की व्यवस्था करा दें। प्रशासन के आदेश पर जिऌला ड्रग कंट्रोल अधिकारी के पास सभी नियमों का पालन करते हुए प्रपत्र भेज भी दिए हैं। स्थिति यह है कि ड्रग कंट्रोलर अधिकारी अस्पताल के संचालकों के फोन भी नहीं उठा रहे हैं।
बड़े अस्पतालों में आसानी से पहुंचा रहे हैं इंजेक्शन
शहर के मेदांता, फोर्टिस, आर्टेमिस जैसे नामी अस्पतालों में न तो ऑक्सीजन की कमी बताई जा रही है। न ही वहां पर रेमिडेसिवर इंजेक्शन की कमी। वहां के अधिकांश तीमारदारों का कहना है कि उनके सामने इस तरह की कोई दिक्कत नहीं है। मेदांता में मेजा (इलाहाबाद) के नीरज शर्मा का इलाज चल रहा है। उनके तीमारदार का कहना है कि ऑक्सीजन भी है और इंजेक्शन भी लग रहे हैं। कोई शिकायत नहीं है।
मुख्य चिकित्साधिकारी विरेंद्र यादव का कहना है कि रेमिडेसिवर इंजेक्शन की व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी जिला ड्रग कंट्रोल अधिकारी अमनदीप चौहान की है। यह व्यवस्था सिविल सर्जन के क्षेत्र में नहीं है। अत: इस बारे मे वह ही बता सकें। इस बारे में डीसी डा. यश गर्ग से जानकारी चाही तो उनका फोन नहीं उठा। मैसेज करके भी उनका पक्ष जानना चाहा तो भी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। जिला ड्रग अधिकारी अमनदीप चौहान ने भी इस बारे में कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।
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