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कोरोना मरीजों से अधिक राशि वसूलने में 20 से अधिक अस्पताल दोषी

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गुरुग्राम। कोरोना मरीजों से इलाज के नाम पर सरकार की ओर से तय राशि से अधिक वसूली के मामले में शहर के 20 से अधिक अस्पताल जांच में दोषी पाए गए हैं। नगराधीश सिद्धार्थ दहिया ने जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे संभवत: बुधवार को महानिदेशक (स्वास्थ्य सेवाएं) को सौंप दिया जाएगा। इस बीच कई अस्पतालों ने कार्रवाई के डर से पहले ही मरीजों को तय राशि से अधिक वसूली राशि लौटाकर समझौता कर लिया है। इस कारण पीड़ितों ने अपनी शिकायतें वापस ले ली। लिहाजा उन्हें जांच से बाहर कर दिया गया है।
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जांच में सामने आया कि कुछ शिकायतें सामान्य बीमारियों के मरीजों की ओर से भी दी गई थीं। चूंकि केवल कोरोना मरीजों के लिए सरकार ने रेट तय कर अस्पतालों को गाइडलाइन जारी की थी, ऐसे में उन शिकायतों को भी जांच के दायरे से बाहर ही रखा गया। कुछ शिकायतें इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़ी थीं, जांच कमेटी ने इन्हें भी शामिल नहीं किया। कमेटी के चेयरमैन नगराधीश सिद्धार्थ दहिया के मुताबिक शिकायतों की जांच पूरी हो गई है। इसमें 20 से अधिक अस्पतालों को अधिक राशि वसूलने का दोषी पाया गया है। उन्होंने बताया फिलहाल अस्पतालों के नाम का खुलासा नहीं कर सकते। इनमें शहर के कुछ नामी और बड़े अस्पताल शामिल हैं। कमेटी के अन्य सदस्यों सिविल सर्जन और आईएमए अध्यक्ष के हस्ताक्षर बकाया हैं। दोनों सदस्यों के हस्ताक्षर कराकर रिपोर्ट स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक को सौंपी जाएगी।
महानिदेशक तय करेंगे कार्रवाई
दहिया ने कहा कि रिपोर्ट सौंपे जान के बाद कार्रवाई करने के लिए स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक अधिकृत हैं। वही तय करेंगे कि दोषी अस्पतालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। करीब 55 शिकायतों की जांच की गई है, इनमें से 20 से अधिक पर सीधे तौर पर आरोप सिद्ध होते हैं।
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उपायुक्त को शिकायत की गई थी
कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों के लिए सरकार ने गाइडलाइन जारी की थी। इसमें स्पष्ट रूप से इलाज और जांच के रेट तय कर उतनी ही राशि वसूलने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके कई निजी अस्पतालों ने कोरोना मरीजों ने कई-कई गुना राशि वसूली। मरीजों और तीमारदारों की ओर से उपायुक्त डॉ. यश गर्ग को शिकायत की गई थी। उपायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगराधीश की अध्यक्षता में सिविल सर्जन और आईएमए के जिलाध्यक्ष को शामिल कर जांच कमेटी बनाई थी।
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