मेवात नया जामताड़ा बन गया है। अरावली की आड़ में ठगी का जाल फैलाया जा रहा है। ठग हरियाणा और राजस्थान के बॉर्डर का फायदा उठाते हैं। सिग्नल पकड़ में आते नहीं हैं। साइबर ठगी के खिलाफ मुहिम।
साइबर ठगी में हरियाणा और राजस्थान से जुड़ा मेवात जामताड़ा से भी आगे निकलता जा रहा है। टटलूबाजी से शुरू हुआ ठगी और धोखाधड़ी का यह खेल अब पूरी तरह से हाईटेक हो गया है। दरअसल, हरियाणा के नूंह और फिरोजपुर झिरका के इलाके राजस्थान के कैथवाड़ा, सीकरी और गोपालगढ़ से मिलते हैं।
विज्ञापन
यहां अरावली की पहाड़ी होने के कारण कभी मोबाइल के सिग्नल हरियाणा के आते हैं तो कभी राजस्थान के। इसका साइबर ठग फायदा उठाते हैं और पकड़ में नहीं आते। अब नाबालिगों को भी इसमें शामिल किया जा रहा है, ताकि पुलिस की कार्रवाई से बचा जा सके।
'मैंने भी सीखा था, बाद में डर के कारण छोड़ दिया'
फिरोजपुर झिरका में एक व्यापारी के पास काम कर रहे युवक ने बताया कि वह बॉर्डर के गांवों में ट्रेनिंग लेने गया था। गांव के 15-20 लड़के थे। सुबह होते ही पहाड़ी पर चले जाते थे। लड़की बनकर बात करते थे। पहले मैसेंजर पर चैट करते और बाद में व्हाट्सएप नंबर लेकर कॉल और फिर वीडियो कॉल की जाती।
विज्ञापन
वीडियो कॉल पर दूसरे फोन की स्क्रीन से सामने वाले व्यक्ति को अश्लील फिल्म दिखाई जाती और उसका वीडियो बना लिया जाता। फिर पुलिस बनकर फोन किया जाता। डरा-धमकाकर पैसा वसूल लिया जाता। युवक ने बताया कि पहले ही महीने उसने एक लाख कमाए, लेकिन पुलिस की धरपकड़ के बाद कई रिश्तेदार जेल चले गए और उसने यह काम छोड़ दिया।
क्या है टटलूबाजी
यह क्षेत्र पिछले कई दशकों से टटलूबाजी के लिए प्रसिद्ध रहा है। टटलू का मतलब ठगी होता है। नब्बे के दशक में यह क्षेत्र भैंस चोरी के लिए जाना जाता। इसके बाद वाहन चोरी होने के साथ चुराए वाहनों को रखने का अड्डा बन गया। एक स्थानीय पत्रकार ने बताया कि उनकी चोरी की बाइक भी अगले दिन वहीं से बरामद करा दी गई थी। बाद में यहां के लोगों ने सोने की ईंट के नाम पर टटलू बनाना शुरू किया।
इसमें कोई मजदूर या गरीब किसान बनकर किसी सराफ या व्यापारी को फोन करके बताता था कि खेत में या पुराने घर में खोदाई में सोने की ईंट निकली है। सैंपल के तौर पर एक छोटा-सा कोना असली सोने का भेज दिया जाता। लालच में आकर व्यापारी आ जाता और उसके बाद में नकली ईंट और सामान दे दिया जाता। ऐसे ही टटलू बनाकर हरियाणा और राजस्थान की सीमा से जुड़े मेवात क्षेत्र के लोगों ने काफी पैसा ठगी से कमाया।
ऑनलाइन बेचने में देशभक्ति का पैंतरा
हरियाणा और राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में काफी लोग सेना में हैं। इसी का फायदा साइबर ठगों ने उठाना शुरू कर दिया। ऑनलाइन सामान खरीदने वाली तमाम वेबसाइटों पर कार, बाइक या दूसरा सामान बेचने का विज्ञापन डालते।
बात होने पर सेना में कार्यरत होने के कारण पोस्टिंग का हवाला दिया जाता। लोग झांसे में आ जाते और खाते में पैसा ट्रांसफर करवा लेते। जामताड़ा के गांवों की तरह की यहां पर भी पैसा आने के बाद सूरत बदलने लगी। पहले ठगों ने घर बनवाए बाद में महंगी कारें और बाइकें खरीदीं।
सामाजिक जागृति से इस बुराई से लड़ने की तैयारी
नया जामताड़ा बन रहे मेवात के स्थानीय लोग इस कलंक को हटाना चाहते हैं। राजस्थान के डीग जिले के गांव पालडी के लोगों ने गांव में साइबर ठगी के लिए लाए गए 300 मोबाइल और 400 सिम कार्ड तोड़ दिए। गांववालों का कहना है कि वे आगे भी अपराध का विरोध करेंगे। हालांकि, मेवात में हरियाणा के गांव बिछौर, नवलगढ़, लफूरी, बिसरू, जमालगढ़, मनोता, अकबरपुर, हथनगांव, अमीनाबाद, खेड़ा गांवों के साथ राजस्थान के गांवों जुरहेडा, जुरहेड़ी, धीमरी, कठोल और थलचना गांव इसमें संलिप्त हैं।
कई गिरोह पकड़े गए : जिले में लगातार कार्रवाई की जा रही है। साइबर ठगों के खिलाफ पिछले दिनों अभियान भी चलाया गया है। कई गिरोह पकड़े गए हैं। पुलिस भी तकनीक का सहारा ले रही है। -विजय प्रताप, एसपी नूंह