आषाढ़ मेले को लेकर सजा है माता शीतला का दरबार
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आषाढ़ मेले के दौरान माता शीतला के दरबार में भक्त आने लगे हैं। रविवार और सोमवार को दर्शन के लिए मंदिर 24 घंटे के लिए खोला गया। मंदिर के अधिकारी यज्ञ दत्त शर्मा ने बताया कि 26 जून से गुप्त नवरात्र शुरू होंगे। गुप्त नवरात्र से आषाढ़ मेले के खत्म होने तक मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा। हालांकि 4 जुलाई को नवरात्र खत्म होने के बाद भक्तों की संख्या कम हो जाएगी। अभी दूर दराज से भक्त आ रहे हैं।
गुप्त नवरात्र के दौरान होगी विशेष पूजा अर्चना
गुप्त नवरात्र के दौरान मोक्ष प्राप्ति के लिए तंत्र साधना और देवी की विशेष पूजा का महात्म्य है। साल में चार बार देवी पूजा के लिए विशेष नवरात्र होते हैं। चैत्र महीने में वासंती नवरात्र और अश्विन महीने का शारदीय नवरात्र प्रकट नवरात्र कहलाता है। माघ और आषाढ़ के महीने के शुक्ल पक्ष के नौ दिन गुप्त नवरात्र कहलाते हैं। माता शीतला के दरबार में चैत्र और आषाढ़ के महीने में मेला लगता है। नवरात्रों के दौरान लोग दर्शन के लिए आते हैं।
रास्ते पर बैठ कर में करना पड़ रहा भोजन
मंदिर के नए भवन के निर्माण के कारण परिसर का करीब 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बंद है। माता के दर्शन पुराने सत्संग भवन में किया जा रहा है। मंदिर मुंडन और पूजन के दूरदराज से आने वाले लोगों के बैठने की जगह नहीं है। आने-जाने के रास्ते पर बिछे कारपेट पर बैठकर कई परिवार पूजा के बाद अपने घर से लेकर आए भोजन करते नजर आए। कुछ लोग मंदिर दर्शन के लिए बने पुराने रैंप के नीचे बैठकर भजन और भोजन करते दिखे। नया मंदिर छह साल से निर्माणाधीन है। बताया जा रहा है कि अभी डेढ़ साल का समय और लगेगा।
श्रद्धालुओं ने कहा
हापुड़ से आई हूं। बच्चों का मुंडन कराना था। हमारे परिवार की परंपरा रही है। बच्चों के मुंडन माता के मंदिर में ही होते हैं। परिवार से पीढ़ी दर पीढ़ी लोग आते रहे हैं। मंदिर जल्द बन जाए तो भक्तों को आसानी होगी।
- पिंकी शर्मा
बच्चे के मुंडन के लिए आई हूं। मंदिर में बाकी व्यवस्था तो ठीक है मगर मंदिर का बड़ा हिस्सा बंद होने के कारण परेशानी होती है। मजबूर होकर रास्ते पर बैठकर खाना पड़ता है। मंदिर परिसर के पास रात में रुकने का रिवाज भी रहा है। - पायल शर्मा
हिमाचल प्रदेश से यहां आई हूं। बच्चे का मुंडन कराना था। मूलत: आगरा की रहने वाली हूं। विवाह के आठ साल बाद आईवीएफ से संतान प्राप्ति हुई। यहां मुंडन के लिए मन्नत मांग रखा था। अनुराधा