सिविल लाइन्स रोड पर लगी स्ट्रीट लाइट व तिरंगा लाईंटें भी हुई ठप्प
दिनेश देशवाल
नूंह। जिला मुख्यालय नूंह के दो प्रमुख चोराहों पर लाखों खर्च कर शुरू किया गया ट्रैफिक सिग्नल कंट्रोल सिस्टम करीब दो माह भी नहीं चल पाया है। इस सिस्टम को शुरू करवाने में तत्कालीन उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने विशेष रुचि रखते हुए अपनी भूमिका निभाई थी, लेकिन नूंह नगरपरिषद और नूंह शहर थाना इस सुविधापूर्ण योजना को दो माह भी सुचारु नहीं रख पाए।
बता दें कि 19 जुलाई को 14 लाख 38 हजार रुपये की लागत से एनएच 248 ए पर स्थित पलवल टी-पॉइंट पर आधुनिक ट्रैफिक लाइट सिस्टम तथा शहर के सबसे व्यस्त अड़बर चौक पर 13 लाख 32, हजार रुपये की लागत से सोलर पावर्ड हाइब्रिड ट्रैफिक सिग्नल कंट्रोल सिस्टम स्थापित किया गया था। जिले में सड़क सुरक्षा एवं आधुनिक यातायात प्रबंधन की दिशा में प्रशासन द्वारा एक ठोस पहल करते हुए ट्रैफिक नियंत्रण और सड़क सुरक्षा के लिए यह योजना शुरू की गई थी। यह परियोजना नगरीय स्थानीय निकाय विभाग द्वारा संचालित की जानी थी।
अमर उजाला की टीम ने बुधवार को इनकी पड़ताल की तो पाया कि दोपहर 12:41 बजे पलवल टी-प्वाइंट पर चला ट्रैफिक सिग्नल कंट्रोल सिस्टम बंद पड़ा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिस्टम मुश्किल से दो-तीन दिन ही चला है, उसके बाद से ही यह बंद है।
बिना चालान के नहीं हो रहा नियम का पालन:
वहीं नूंह के सबसे व्यस्त अड़बर चौक पर लगाया गया सिस्टम ठीक चल रहा है, लेकिन लोगों को आसानी से यातायात नियम तोड़ते व रेड लाइट जंप करते हुए देखा जा सकता है। दोपहर बाद 2:30 बजे रेड लाइट तो शुरू थी, लेकिन उसकी चिंता किए बगैर वाहन चालक नियमों की धज्जियां उडा रहे थे। यहां मौजूद पुलिस चेक पोस्ट के जवान आराम से पेड़ की छांव में बैठे इस सारे नजारे को देख रहे थे, लेकिन न पुलिसकर्मियों को और न ही वाहन चालकों को रेड लाइट की कोई चिंता नजर आ रही थी।
ठप्प हुई तिरंगा व स्ट्रीट लाइट: पलवल टी-प्वाइंट से जिला सचिवालय के सामने से सालाहेड़ी गांव के बस स्टैंड तक लगी अधिकांश स्ट्रीट लाइट तथा तिरंगा लाइट ठप्प हो गई हैं। सिविल लाइन रोड पर सर्किट हाउस, आफीसर्स काॅलोनी, जिला सचिवालय, जिला न्यायिक परिसर तथा जिला परिषद कार्यालय तक जाने के लिए रोड पर ये स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थी, शाम 6:45 बजे इनमें से अधिकांश लाइटें बंद थी।
एडवोकेट शमीम अहमद, नियामत अली, रघुराज नंबरदार, आस मोहम्मद सालाहेड़ी, एडवोकेट खलील अहमद, आसिफ अली, परवीन शर्मा, नरेंद्र गौतम, बिहारी देशवाल आदि ने कहा कि नगरपरिषद द्वारा सरकारी योजनाओं और नियमों को मखौल बनाया हुआ है। पलवल टी-प्वाइंट सबसे अधिक दुर्घटना संभावित क्षेत्र है, यहां पर रेड लाइट लगी तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब वाहनों को सुविधा रहेगी, लेकिन इस रेड लाइट पर 15 लाख रुपये खर्च कर दिए और इसे 15 दिन भी चालू नहीं रखा गया।
रेड लाइट वाली एजेंसी को नोटिस दिया हुआ है, यह अभी गारंटी पीरियड में है, जल्द इसे ठीक करवाया जाएगा। तिरंगा लाइटों की वायर को कोई चोर तोड़कर ले गया, जिन्हें जल्द दुरुस्त करवाया जाएगा। -संजय मनोचा, चेयरमैन नगरपरिषद नूंह।